News Saga Desk
एक तरफ दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल क्रांति और एडवांस टेक्नोलॉजी की बात कर रही है। भारत को “विश्व गुरु” बनाने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन इसी देश के कई गांव आज भी ऐसी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे हैं, जो किसी भी इंसान के लिए सामान्य जीवन का हिस्सा होनी चाहिए।
भीषण गर्मी के बीच देश के दूरदराज इलाकों से लगातार ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं, जो विकास के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करती हैं। कहीं लोग जमीन खोदकर चुंआ से पानी निकालने को मजबूर हैं, तो कहीं गंदे नालों और दूषित जलस्रोतों से प्यास बुझा रहे हैं उसी पानी से, जहां जानवर भी पानी पीते नजर आते हैं।
अब मध्यप्रदेश के धूलकोट से आई तस्वीरों ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। यहां छोटे-छोटे बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर पहाड़ी रास्तों पर चढ़ाई कर सिर्फ एक बाल्टी पानी लाने को मजबूर हैं। तपती धूप, खतरनाक रास्ते और कंधों पर पानी का बोझ यह दृश्य किसी रोमांचक खेल का नहीं, बल्कि उस मजबूरी का है जहां पानी के लिए संघर्ष रोज की जिंदगी बन चुका है।
इन बच्चों को देखकर ऐसा लगता है मानो वे “माउंटेन क्लाइम्बिंग” का कोई रिकॉर्ड बना रहे हों, लेकिन सच्चाई यह है कि वे सिर्फ अपने घर के लिए पानी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। वह भी साफ पानी नहीं, बल्कि ऐसा पानी जिसे पीना भी स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है।
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