राज्यसभा चुनाव 2026 में झारखंड से एनडीए समर्थित उम्मीदवार परिमल नथवानी के नामांकन को लेकर विवाद गहरा गया है। कांग्रेस की आपत्तियों पर सुनवाई के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने फैसला शाम 5 बजे तक सुरक्षित रख लिया है। नामांकन पत्र में कथित त्रुटियों, आपराधिक मामलों और अन्य जानकारियों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
News Saga Desk
झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी लगातार बढ़ती जा रही है। एनडीए समर्थित उम्मीदवार परिमल नथवानी के नामांकन पत्र को लेकर उठे विवाद के बीच बुधवार को झारखंड विधानसभा में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। रिटर्निंग ऑफिसर एवं विधानसभा के प्रभारी सचिव रंजीत कुमार के समक्ष कांग्रेस द्वारा दर्ज आपत्तियों पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। सुनवाई पूरी होने के बाद निर्णय को शाम पांच बजे तक के लिए सुरक्षित रख लिया गया।
इस मामले को लेकर दिनभर विधानसभा परिसर और राजनीतिक गलियारों में हलचल बनी रही। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने परिमल नथवानी के नामांकन को रद्द करने की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन भी किया। कांग्रेस का आरोप है कि नामांकन पत्र में कई गंभीर त्रुटियां हैं, जिनके आधार पर उनका नामांकन निरस्त किया जाना चाहिए।
कांग्रेस ने नामांकन पत्र में बताई कई खामियां
कांग्रेस की ओर से दावा किया गया है कि परिमल नथवानी द्वारा दाखिल नामांकन पत्र में कई महत्वपूर्ण जानकारियां या तो गलत हैं या पूरी तरह स्पष्ट नहीं की गई हैं। पार्टी ने विशेष रूप से उनके नाम से जुड़े दस्तावेजों में भिन्नता, कंपनी निदेशक पदों की जानकारी तथा आपराधिक मामलों के ब्योरे को लेकर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उम्मीदवार द्वारा दी गई सभी जानकारियां स्पष्ट और तथ्यात्मक होनी चाहिए। यदि किसी भी स्तर पर जानकारी अधूरी या भ्रामक पाई जाती है तो निर्वाचन नियमों के तहत उस पर कार्रवाई की जा सकती है।
सलमान खुर्शीद ने प्रक्रिया पर उठाए सवाल
कांग्रेस की ओर से पक्ष रखने के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेता और जाने-माने अधिवक्ता सलमान खुर्शीद दिल्ली से रांची पहुंचे थे। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि उनके निर्धारित समय पर पहुंचने के बावजूद उनके आने से पहले ही सुनवाई की प्रक्रिया पूरी कर ली गई।
सलमान खुर्शीद ने कहा कि वे तय कार्यक्रम के अनुसार विधानसभा पहुंचे थे, लेकिन जब तक वे पहुंचे, तब तक सुनवाई की औपचारिक प्रक्रिया समाप्त हो चुकी थी। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई।
हालांकि उनकी अनुपस्थिति में कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र चौहान ने पक्ष रखा। सुरेंद्र चौहान ने रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष विस्तार से अपनी दलीलें पेश करते हुए नामांकन पत्र में कथित त्रुटियों का उल्लेख किया और नामांकन रद्द करने की मांग दोहराई।
परिमल नथवानी ने दिया लिखित जवाब
दूसरी ओर, परिमल नथवानी की ओर से निर्वाचन अधिकारियों द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब दिया गया। जानकारी के अनुसार उनसे नामांकन पत्र में दर्ज कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया था। इसके बाद उन्होंने विधानसभा सचिवालय में अपना लिखित उत्तर और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए।
सूत्रों के मुताबिक नथवानी पक्ष ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप की गई है और मांगी गई सभी जानकारियां समय पर उपलब्ध करा दी गई हैं।
फैसला शाम पांच बजे तक सुरक्षित
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और प्रस्तुत दस्तावेजों की समीक्षा करने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब सभी की निगाहें शाम पांच बजे आने वाले निर्णय पर टिकी हुई हैं।
यदि नामांकन वैध घोषित किया जाता है तो परिमल नथवानी की उम्मीदवारी बरकरार रहेगी। वहीं यदि कांग्रेस की आपत्तियों को सही पाया जाता है तो राज्यसभा चुनाव की तस्वीर बदल सकती है। इस कारण यह मामला झारखंड की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी उत्सुकता
राज्यसभा चुनाव के इस महत्वपूर्ण चरण में परिमल नथवानी के नामांकन को लेकर जारी विवाद ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। कांग्रेस जहां अपने आरोपों पर कायम है, वहीं एनडीए खेमे को उम्मीद है कि नामांकन पूरी तरह वैध साबित होगा। अब अंतिम फैसला आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
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