झारखंड के लोहरदगा जिले में पुलिस का संवेदनशील और मानवीय चेहरा देखने को मिला। अंधविश्वास के कारण एक व्यक्ति का अंतिम संस्कार रुका हुआ था, लेकिन थाना प्रभारी ने मौके पर पहुंचकर विवाद सुलझाया और स्वयं शव को कंधा देकर अंतिम संस्कार संपन्न कराया। इस पहल ने न केवल मानवता की मिसाल पेश की, बल्कि समाज को अंधविश्वास से ऊपर उठकर संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी दिया।

सूचना मिलते ही थाना प्रभारी नीरज झा दलबल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले उत्तेजित ग्रामीणों को शांत कराया और दोनों पक्षों के साथ संवाद स्थापित किया। उन्होंने अंधविश्वास के कुप्रभावों के बारे में समझाते हुए स्पष्ट किया कि एक सम्मानजनक अंतिम संस्कार मृतक का अधिकार है और इसमें बाधा डालना न केवल अमानवीय है, बल्कि कानूनन अपराध भी है।
थाना प्रभारी की सूझबूझ और मानवीय दृष्टिकोण के सामने अंधविश्वास का शोर दब गया। विवाद सुलझने के बाद, नीरज झा ने स्वयं आगे बढ़कर शव को कंधा दिया और उसे श्मशान घाट तक पहुंचाया। पुलिस अधिकारी को इस मानवीय रूप में देख वहां मौजूद ग्रामीण और परिजन भावुक हो गए। स्थानीय निवासियों ने थाना प्रभारी के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाई, बल्कि पुलिस के मानवीय चेहरे को भी जन-जन तक पहुंचाया है
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