NEWS SAGA DESK
Radhakrishna Kishore Security पर झारखंड सरकार ने बड़ा फैसला लिया। वित्त मंत्री की सुरक्षा में तीसरी एस्कॉर्ट गाड़ी फिर जोड़ी गई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हस्तक्षेप से विवाद समाप्त।

झारखंड सरकार ने वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की सुरक्षा (Radhakrishna Kishore Security) को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहे विवाद पर आखिरकार विराम लगा दिया है। राज्य सरकार ने उनकी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद एक अतिरिक्त एस्कॉर्ट वाहन फिर से तैनात करने का फैसला लिया है। नए आदेश के अनुसार अब वित्त मंत्री के काफिले के साथ कुल तीन एस्कॉर्ट वाहन रहेंगे। पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर आईजी प्रोविजन ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है।
इस फैसले के साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे विवाद का समाधान हो गया है। वित्त मंत्री ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का आभार व्यक्त किया और कहा कि उनके व्यक्तिगत हस्तक्षेप से मामले का सकारात्मक समाधान संभव हो पाया।
मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से निकला समाधान
Radhakrishna Kishore Security विवाद के समाधान के बाद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सुरक्षा से जुड़े मुद्दे की गंभीरता को समझा और तत्काल उचित कदम उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्णय से न केवल सुरक्षा व्यवस्था बहाल हुई, बल्कि पूरे विवाद का भी शांतिपूर्ण तरीके से अंत हो गया।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए किया गया है और इससे उनके साथ-साथ सुरक्षा एजेंसियों का भी मनोबल बढ़ेगा।
कुछ दिन पहले झारखंड गृह विभाग ने वित्त मंत्री के काफिले से एक एस्कॉर्ट वाहन हटाने का आदेश जारी किया था। इस फैसले के बाद उनकी सुरक्षा में लगी एस्कॉर्ट गाड़ियों की संख्या कम हो गई थी।
इस निर्णय का विरोध करते हुए वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपनी सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों और एस्कॉर्ट वाहनों को वापस लौटा दिया था। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां दूर से उनकी निगरानी करती रहीं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
मामला राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया था। इसके बाद मुख्यमंत्री के स्तर पर पूरे मामले की समीक्षा की गई।
पलामू क्षेत्र की सुरक्षा चिंताओं का किया जिक्र
Radhakrishna Kishore Security को लेकर वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी अधिकारी या विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाना नहीं था।
उन्होंने कहा कि पलामू क्षेत्र लंबे समय से उग्रवाद और संगठित अपराध की चुनौतियों से प्रभावित रहा है। ऐसे क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त सतर्कता जरूरी होती है। उनकी चिंता केवल सुरक्षा मानकों और संभावित जोखिमों को लेकर थी, न कि किसी प्रशासनिक निर्णय का विरोध करना।
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उन्होंने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा केवल व्यक्तिगत मुद्दा नहीं, बल्कि संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासनिक जिम्मेदारी का भी हिस्सा है।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद पुलिस मुख्यालय ने वित्त मंत्री की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया कि उनकी सुरक्षा में पहले की तरह एक अतिरिक्त एस्कॉर्ट वाहन फिर से शामिल किया जाए।
आईजी प्रोविजन की ओर से जारी आदेश के अनुसार अब वित्त मंत्री के काफिले के साथ कुल तीन एस्कॉर्ट वाहन तैनात रहेंगे। सुरक्षा एजेंसियों को नए निर्देशों के अनुरूप तत्काल व्यवस्था लागू करने को कहा गया है।
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