आरजी कर केस में नई FIR, निर्मल घोष समेत 3 पर आरोप

आरजी कर केस में नई FIR दर्ज हुई है। निर्मल घोष समेत तीन पर साक्ष्य मिटाने और आपराधिक साजिश के आरोप हैं। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी जांच में।

News saga Desk

कोलकाता: चर्चित आरजी कर केस में जांच का दायरा एक बार फिर बढ़ गया है। महिला चिकित्सक की मौत के मामले में साक्ष्य मिटाने और आपराधिक साजिश के आरोपों को लेकर नई प्राथमिकी दर्ज की गई है। मृतका के पिता की ओर से बैरकपुर पुलिस आयुक्तालय में लिखित शिकायत दिए जाने के बाद यह कार्रवाई हुई। शिकायत में तत्कालीन पानीहाटी तृणमूल कांग्रेस विधायक निर्मल घोष, सोमनाथ दे और संजीव मुखर्जी समेत अन्य लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। बैरकपुर पुलिस कमिश्नरेट ने मंगलवार सुबह नई प्राथमिकी दर्ज किए जाने की पुष्टि की है।

आरजी कर केस में नई FIR क्यों हुई?

नई प्राथमिकी का केंद्र मृतका के अंतिम संस्कार से जुड़ी प्रक्रिया और उस दौरान कथित तौर पर हुई अनियमितताएं हैं। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घटना की दूसरी बरसी के मौके पर पानीहाटी में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में इस मामले से जुड़े कुछ नए सवाल उठाए थे। इसके बाद उन्होंने बैरकपुर पुलिस आयुक्त के नेतृत्व में विशेष जांच दल गठित करने और अलग से मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।

सरकार की ओर से कहा गया है कि नई जांच का उद्देश्य उन पहलुओं की पड़ताल करना है, जिन पर अब तक स्पष्टता नहीं आ सकी है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच करेगी।

अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पर उठे सवाल

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मृतका के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, घोला थाना क्षेत्र के नाटागढ़ कदमतला श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के दौरान नियमों का पालन नहीं किया गया।

आरोप है कि अंतिम संस्कार के लिए मृतका के शव का क्रम पहले तीन था, जिसे बाद में बदलकर क्रम संख्या एक कर दिया गया। इसके बाद रात में ही अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया को लेकर अब पुलिस दस्तावेजों और उस समय मौजूद लोगों की भूमिका की जांच करेगी।

आरजी कर

पुलिस यह भी पता लगाएगी कि अंतिम संस्कार का निर्धारित शुल्क परिवार से क्यों नहीं लिया गया और मृतका के किसी निकट संबंधी के आवश्यक हस्ताक्षर क्यों नहीं कराए गए।

निर्मल घोष समेत तीन लोगों की भूमिका जांच के घेरे में

नई FIR में निर्मल घोष, सोमनाथ दे और संजीव मुखर्जी समेत अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। शिकायत में इन लोगों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज होना आरोपों का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता। आरोपों की पुष्टि या खंडन जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।

जांच एजेंसी अंतिम संस्कार से जुड़े रिकॉर्ड, श्मशान घाट के दस्तावेज, शुल्क से संबंधित जानकारी और उस समय वहां मौजूद लोगों से पूछताछ कर सकती है। इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता हुई थी या नहीं।

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पुलिस अधिकारियों पर पहले भी हुई कार्रवाई

सरकार के मुताबिक, ड्यूटी में लापरवाही से जुड़े आरोपों को लेकर पुलिस के तीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ पहले ही कड़ी कार्रवाई की जा चुकी है। उन्हें निलंबित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

नई FIR के बाद पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती होगी कि अंतिम संस्कार से जुड़ी घटनाओं में किसकी क्या भूमिका थी और क्या किसी स्तर पर जानबूझकर नियमों की अनदेखी या साक्ष्यों को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला चिकित्सक की मौत के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन, पुलिस कार्रवाई, जांच प्रक्रिया और साक्ष्यों से जुड़े कई सवाल उठे। बाद में मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी और अदालत की निगरानी में आगे बढ़ी।

समय के साथ मामले में अलग-अलग पहलुओं की जांच होती रही। अब राज्य पुलिस की नई जांच अंतिम संस्कार की प्रक्रिया और उससे जुड़े कथित अनियमितताओं पर केंद्रित होगी। इससे आरजी कर केस में एक नया जांच कोण सामने आया है।

नई प्राथमिकी से मामले में राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर गतिविधियां बढ़ सकती हैं। अंतिम संस्कार से जुड़े दस्तावेजों और उस समय की परिस्थितियों की जांच से यह स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि क्या निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ था।

मृतका के परिवार और मामले पर नजर रख रहे लोगों के लिए यह जांच इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें उन सवालों को शामिल किया गया है, जिन्हें लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। हालांकि, जांच के निष्कर्ष सामने आने तक किसी भी आरोप को तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।

बैरकपुर पुलिस कमिश्नरेट ने नई प्राथमिकी दर्ज किए जाने की पुष्टि की है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए साक्ष्य मिटाने, आपराधिक साजिश और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया से जुड़े आरोपों की जांच करेगी।

सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि नई जांच का उद्देश्य पुराने मामले से जुड़े अनुत्तरित सवालों की पड़ताल करना है। आरजी कर केस में केंद्रीय जांच एजेंसी और अदालत की ओर से चल रही प्रक्रियाओं के समानांतर राज्य पुलिस की यह जांच भी आगे बढ़ेगी।

फिलहाल निर्मल घोष, सोमनाथ दे और संजीव मुखर्जी पर लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं। अंतिम निष्कर्ष पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।

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