NEWS SAGA DESK
JSSC-CGL रद्द होने के बाद सफल अभ्यर्थी हाईकोर्ट पहुंचे हैं। नौकरी बचाने की मांग को लेकर प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन भी किया गया।
झारखंड सरकार की ओर से JSSC-CGL समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द किए जाने के बाद मामला अब सड़कों से निकलकर अदालत तक पहुंच गया है। परीक्षा में सफल होकर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले अभ्यर्थियों ने फैसले के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया है। प्रभावित अभ्यर्थियों की ओर से याचिकाएं दाखिल करने का सिलसिला शुरू हो गया है। बुधवार को दायर एक याचिका में मामले की जल्द सुनवाई करने का आग्रह किया गया। बताते चले की आज हाई कोर्ट में सुनवाई होगी I

गलती कुछ की तो सजा सबको क्यों- अभ्यर्थियों
सफल अभ्यर्थियों का कहना है कि पूरी चयन प्रक्रिया में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। उनका तर्क है कि अगर परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया में कुछ लोगों ने अनियमितता की है तो जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन सभी चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी खत्म करना उचित नहीं है।
याचिकाकर्ताओं का दावा है कि उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा में सफलता पाने के लिए वर्षों तक मेहनत की और मेरिट के आधार पर नियुक्ति हासिल की। ऐसे में कुछ अभ्यर्थियों की कथित गड़बड़ी के कारण सभी सफल उम्मीदवारों को नौकरी से हटाना उनके साथ अन्याय है।
हाईकोर्ट के पुराने आदेश का भी दिया जा रहा हवाला
याचिका में यह भी कहा गया है कि नियुक्तियां मनमाने तरीके से नहीं हुई थीं। अभ्यर्थियों के अनुसार, हाईकोर्ट के पूर्व निर्देशों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत परिणाम जारी होने के बाद नियुक्तियां की गई थीं। इसी आधार पर उनका कहना है कि जब तक किसी व्यक्तिगत अभ्यर्थी की संलिप्तता या गलत भूमिका साबित नहीं होती, तब तक पूरी चयन प्रक्रिया को एक साथ रद्द करना सही नहीं है.
प्रोजेक्ट भवन से कोर्ट तक पहुंचा मामला
परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले ने अभ्यर्थियों के दो अलग-अलग पक्ष सामने ला दिए हैं। लंबे समय से परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों के एक वर्ग ने फैसले का स्वागत किया है। वहीं, नियुक्ति पा चुके युवाओं के सामने अब नौकरी बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
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प्रदर्शन कर रहे कई अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने दूसरी सरकारी नौकरियों और करियर के अन्य विकल्पों को छोड़कर झारखंड में सेवा शुरू की थी। अचानक नियुक्ति रद्द होने से उनके सामने आर्थिक और भविष्य से जुड़ी गंभीर परेशानियां पैदा हो गई हैं। अब इस पूरे विवाद का अगला पड़ाव झारखंड हाईकोर्ट है। याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत का रुख क्या रहता है और प्रभावित कर्मचारियों को कोई राहत मिलती है या नहीं, इस पर हजारों अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हुई हैं।
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