जयराम महतो विवाद पर शैलेंद्र महतो ने सरकार से कार्रवाई मांगी

NEWS SAGA DESK

जयराम महतो और थाना प्रभारी विवाद पर पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो ने पुलिस एसोसिएशन के हस्तक्षेप पर सवाल उठाए और सरकार से कार्रवाई की मांग की।

जयराम महतो विवाद को लेकर झारखंड अलग राज्य आंदोलन के सूत्रधार और पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने विधायक जयराम महतो और थाना प्रभारी के बीच हुए विवाद में झारखंड पुलिस एसोसिएशन के हस्तक्षेप को अनुचित बताते हुए राज्य सरकार से संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। शैलेंद्र महतो ने कहा कि यदि पुलिस एसोसिएशन किसी दारोगा के पक्ष में खड़ी होती है, तो इससे आम लोगों के बीच गलत संदेश जाएगा और स्थिति ऐसी बन सकती है कि पूरा झारखंड जयराम महतो के समर्थन में सड़क पर उतर आए।

पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो

पूर्व सांसद ने कहा कि जयराम महतो ने ऐसा कोई गलत काम नहीं किया है, जिसके लिए उन्हें माफी मांगने की जरूरत हो या उनकी गिरफ्तारी की स्थिति पैदा हो। उन्होंने पूरे प्रकरण को जनप्रतिनिधि और प्रशासन के बीच संबंधों तथा लोकतांत्रिक मर्यादाओं के नजरिए से देखने की जरूरत बताई।

पुलिस एसोसिएशन के हस्तक्षेप पर उठाए सवाल

जयराम महतो विवाद पर अपनी बात रखते हुए शैलेंद्र महतो ने कहा कि जनप्रतिनिधियों और पुलिस अधिकारियों के बीच कई बार तीखी नोकझोंक की स्थिति बन जाती है। ऐसी परिस्थितियों में संबंधित पक्षों के बीच कानून और नियमों के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन किसी पुलिस संगठन का किसी एक अधिकारी के पक्ष में खुलकर सामने आना उचित नहीं है।

उन्होंने पुलिस एसोसिएशन से निष्पक्ष भूमिका निभाने की अपील की। उनके मुताबिक, एसोसिएशन को किसी दारोगा का पक्ष लेने के बजाय राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और पुलिस बल की संस्थागत गरिमा पर ध्यान देना चाहिए।

शैलेंद्र महतो ने यह भी कहा कि राजनीतिक और जन आंदोलनों से जुड़े लोगों को मुकदमों या प्रशासनिक दबाव से डराया नहीं जा सकता। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को लोकतांत्रिक अधिकारों और जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जोड़कर देखा।

‘झारखंड की समरगाथा’ का किया उल्लेख

पूर्व सांसद ने अपनी पुस्तक ‘झारखंड की समरगाथा’ का उल्लेख करते हुए कहा कि झारखंड राज्य का निर्माण संघर्षों और लंबे आंदोलन के बाद हुआ है। उन्होंने आंदोलन के दौरान झेली गई कठिनाइयों को याद करते हुए कहा कि अलग राज्य का सपना पूरा करने के लिए आंदोलनकारियों ने अनेक मुश्किलों का सामना किया था।

उनका कहना था कि राज्य गठन के 26 साल बाद भी यदि प्रशासन में बैठे किसी व्यक्ति की ओर से निर्वाचित जनप्रतिनिधि के साथ दबंगई की स्थिति पैदा होती है, तो यह गंभीर विषय है। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधि और प्रशासन दोनों की अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियां हैं और दोनों के बीच सम्मानजनक व्यवहार जरूरी है।

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