भारत में कमजोर मॉनसून से खरीफ फसलों, ग्रामीण आय और खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। सितंबर की बारिश अब किसानों के लिए अहम मानी जा रही है।
News Saga Desk
भारत में इस साल मॉनसून का प्रदर्शन चिंता बढ़ाने वाला रहा है। कहीं बारिश की भारी कमी ने खेतों को प्रभावित किया है, तो कहीं अचानक हुई तेज बारिश ने खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाया है। बारिश का असर अब खेती, जलाशयों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है।
मॉनसून की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इस सीजन में देश में सामान्य से करीब 15% कम बारिश होने का अनुमान जताया जा रहा है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो यह 2009 के बाद भारत में सबसे कमजोर मॉनसून हो सकता है। कमजोर बारिश का सीधा असर खरीफ फसलों के उत्पादन, खाद्य कीमतों और ग्रामीण आय पर पड़ने की आशंका है।
भारत की सालाना बारिश का लगभग 70% हिस्सा दक्षिण-पश्चिम मॉनसून से आता है। ऐसे में बारिश में बड़ी कमी का असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जलाशयों में पानी की उपलब्धता और आने वाले रबी सीजन की तैयारियों पर भी पड़ता है।
सितंबर की बारिश पर टिकी किसानों की उम्मीद
सितंबर का महीना खरीफ फसलों के लिए बेहद अहम माना जाता है। इस दौरान पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो कपास, सोयाबीन, मक्का और दालों जैसी फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, रबी सीजन में बोई जाने वाली गेहूं और रेपसीड जैसी फसलों के लिए भी पर्याप्त मिट्टी की नमी जरूरी होगी। सूत्रों के मुताबिक, सितंबर में देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। पूर्वी भारत के कुछ इलाकों को इससे अलग राहत मिल सकती है। यदि बारिश का यह कमजोर दौर जारी रहता है, तो मौजूदा मौसमी कमी और बढ़ सकती है।

अल नीनो ने बढ़ाई मुश्किल
कमजोर मॉनसून के पीछे अल नीनो को प्रमुख कारणों में से एक माना जा रहा है। अल नीनो के दौरान मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का समुद्री सतह तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसका असर वैश्विक मौसम प्रणाली पर पड़ता है और भारत जैसे देशों में मॉनसून की गतिविधियां कमजोर हो सकती हैं। भारत में पहले भी अल नीनो वाले कई वर्षों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। कुछ वर्षों में इसका असर इतना गंभीर रहा कि सूखे जैसी स्थिति पैदा हुई और फसल उत्पादन पर बड़ा दबाव आया।
जून से ही कमजोर रहा बारिश का प्रदर्शन
इस मॉनसून सीजन में बारिश का प्रदर्शन लगातार उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 1 जून से अब तक देश में सामान्य के मुकाबले करीब 13% कम बारिश दर्ज की गई है। जून में बारिश सामान्य से लगभग 35.4% कम रही। जुलाई में स्थिति कुछ सुधरी और बारिश करीब 1% अधिक दर्ज हुई, लेकिन अगस्त में एक बार फिर मॉनसून कमजोर पड़ गया। अगस्त में अब तक बारिश सामान्य से लगभग 15% कम रही है। अगर सितंबर में भी बारिश का आंकड़ा कमजोर रहता है, तो खरीफ उत्पादन और रबी फसलों के लिए मिट्टी की नमी दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।
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समय से पहले लौट सकता है मॉनसून
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि कोई नया प्रभावी मौसम तंत्र विकसित नहीं हुआ तो इस साल मॉनसून सामान्य समय से कुछ दिन पहले ही उत्तर-पश्चिम भारत से वापसी शुरू कर सकता है। आमतौर पर मॉनसून की वापसी 17 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिमी हिस्सों से शुरू होती है और अक्टूबर के मध्य तक पूरे देश से इसकी विदाई हो जाती है।
ऐसे में आने वाले कुछ सप्ताह खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। सितंबर में पर्याप्त बारिश हुई तो फसलों को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन बारिश का सिलसिला कमजोर रहा तो उत्पादन, खाद्य महंगाई और ग्रामीण आय तीनों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
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