नीम करोली बाबा के रूप में ऐसे छाए शोभिनव सत्या, आशीर्वाद लेने पहुंचने लगे लोग

NEWS SAGA DESK

Hanuman Ansh में नीब करौरी बाबा का रोल निभाने वाले शोभिनव सत्या ने बताया कि शूटिंग में गांववाले उन्हें सच में बाबा समझने लगे थे।

Hanuman Ansh में नीब करौरी बाबा का किरदार निभाने वाले शोभिनव सत्या इन दिनों अपने अभिनय को लेकर चर्चा में हैं। हालांकि इस भूमिका तक पहुंचने की उनकी कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। शोभिनव फिल्म में शुरुआत से अभिनेता के तौर पर नहीं, बल्कि डायरेक्शन टीम से जुड़े हुए थे। बाद में उन्हें नीब करौरी बाबा की भूमिका निभाने का मौका मिला।

Hanuman Ansh 

इस किरदार को लेकर उनके मन में शुरुआत से ही काफी जिम्मेदारी और डर था, क्योंकि वह खुद आस्तिक हैं और बाबा के आध्यात्मिक व्यक्तित्व को पर्दे पर सही तरीके से पेश करना चाहते थे।

डायरेक्शन से मिला बाबा का किरदार

शोभिनव सत्या ने एक इंटरव्यू में बताया कि वह पहले Hanuman Ansh की डायरेक्शन टीम का हिस्सा थे। फिल्म में नीब करौरी बाबा के किरदार के लिए वह मेकर्स की पहली पसंद नहीं थे। परिस्थितियां ऐसी बनीं कि उन्हें ही यह भूमिका निभाने का अवसर मिल गया। शोभिनव के लिए यह सिर्फ एक फिल्मी किरदार नहीं था। उनके मन में लगातार यह सवाल था कि क्या वह बाबा जैसे आध्यात्मिक व्यक्तित्व के साथ न्याय कर पाएंगे। यही वजह थी कि भूमिका मिलने के बाद उनके भीतर उत्साह के साथ-साथ एक तरह का दबाव भी था।

मंदिर पहुंचे तो गांववालों ने कहा- बाबा

शूटिंग शुरू होने के बाद जब शोभिनव मंदिर पहुंचे तो वहां का अनुभव उनके लिए बेहद खास रहा। उन्हें बाबा के रूप में देखकर गांव के लोग उन्हें ‘बाबा’ कहकर संबोधित करने लगे और जयकारे लगाने लगे। शोभिनव के मुताबिक, उस वक्त उन्हें खुद भी पूरी तरह भरोसा नहीं था कि वह इस किरदार को सही तरीके से निभा पाएंगे। लेकिन गांववालों की सहज प्रतिक्रिया ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। Hanuman Ansh के सेट पर हुआ यह अनुभव उनके लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि उन्हें महसूस हुआ कि उनका लुक और प्रस्तुति स्थानीय लोगों को किरदार के करीब लग रही थी।

शूटिंग के दौरान एक दिन ऐसा भी आया जब पूरी टीम बेस पर चली गई और शोभिनव मंदिर में अकेले रह गए। इसी दौरान वहां मौजूद लोगों ने उनसे पूछा कि उन्हें खाने के लिए कुछ चाहिए या नहीं।

उन्होंने रोटी, नमक और लहसुन मंगवाया। गांव के लोग उनके लिए खाना लेकर आए और उन्होंने मंदिर में बैठकर भोजन किया। शोभिनव के लिए यह अनुभव सामान्य शूटिंग से बिल्कुल अलग था।

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