बोकारो: आरोग्यम सेंटर में आत्महत्या रोकथाम दिवस, तनाव से बचने का संदेश

NEWS SAGA DESK

बोकारो के आरोग्यम सेंटर में आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया गया। डॉ. अरविंद कुमार ने तनाव कम करने और परिवार से संवाद बनाए रखने की सलाह दी।

बोकारो: सेक्टर नौ सेंटर मार्केट स्थित आरोग्यम सेंटर में गुरुवार को आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन सदर अस्पताल के पूर्व डीएस डॉ. अरविंद कुमार ने किया। इस दौरान मानसिक स्वास्थ्य और तनाव से जुड़ी परेशानियों पर खुलकर बातचीत करने की जरूरत पर जोर दिया गया।

आत्महत्या रोकथाम दिवस 

कार्यक्रम में लोगों को बताया गया कि लगातार तनाव, मानसिक परेशानी या भावनात्मक दबाव को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते परिवार, चिकित्सक या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करना जरूरी है। कार्यक्रम के दौरान ओपीडी में पहुंचे मरीजों की विशेष काउंसेलिंग भी की गई।

बढ़ते तनाव के बीच मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान जरूरी

डॉ. अरविंद कुमार ने कहा कि बदलते सामाजिक और जीवनशैली के कारण लोगों में तनाव बढ़ा है। आज अलग-अलग उम्र और परिस्थितियों के लोग किसी न किसी तरह की मानसिक परेशानी से गुजर रहे हैं।उन्होंने कहा कि मानसिक परेशानी को छिपाने या अकेले झेलने के बजाय उसके बारे में बात करना जरूरी है। समय पर सहयोग और उचित सलाह मिलने से व्यक्ति अपनी समस्या को समझने और उससे निपटने के रास्ते तलाश सकता है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य की तरह ही गंभीरता से लिया जाए।कार्यक्रम में परिवार की भूमिका को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया गया। डॉ. अरविंद कुमार ने कहा कि व्यक्ति को अपनी भावनाओं और परेशानियों को परिवार के सदस्यों के साथ साझा करना चाहिए। उन्होंने परिवार के सदस्यों से भी अपील की कि वे अपने आसपास के लोगों के व्यवहार और भावनात्मक स्थिति में होने वाले बदलावों पर ध्यान दें। यदि कोई व्यक्ति लगातार परेशान, अकेला या तनावग्रस्त नजर आता है, तो उससे संवेदनशील तरीके से बातचीत करनी चाहिए।

आत्महत्या रोकथाम दिवस का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या की रोकथाम को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाना है। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि मानसिक परेशानी के समय मदद मांगना कमजोरी नहीं है।

डॉक्टर या काउंसलर से बातचीत करने के साथ परिवार और करीबी लोगों का सहयोग भी महत्वपूर्ण हो सकता है। किसी व्यक्ति की बात को बिना जज किए सुनना और उसे अकेला महसूस नहीं होने देना भी सहायता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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