झारखंड हाईकोर्ट में सीडीपीओ भर्ती रद्द करने के मामले में जेपीएससी ने सरकार के फैसले को उचित बताया और याचिका खारिज करने की मांग की है।
झारखंड हाईकोर्ट में बाल विकास परियोजना पदाधिकारी यानी सीडीपीओ भर्ती प्रक्रिया रद्द किए जाने के मामले में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) ने अपना पक्ष रखा है। आयोग ने अदालत में प्रति-शपथ पत्र दाखिल कर राज्य सरकार के फैसले को उचित ठहराया है। जेपीएससी ने याचिका को खारिज करने की मांग करते हुए कहा है कि परिस्थितियों के आकलन के बाद सरकार को भर्ती प्रक्रिया को समाप्त करने का प्रशासनिक और कार्यकारी अधिकार प्राप्त है।

जेपीएससी की ओर से यह प्रति-शपथ पत्र आयोग के उप सचिव सुधीर कुमार ने दाखिल किया है। मामला विज्ञापन संख्या 21/2023 के तहत शुरू की गयी सीडीपीओ भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। राज्य सरकार ने 18 अगस्त 2026 को अधिसूचना जारी कर इस भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया था। इसके बाद सुभाष मुर्मू और अन्य की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गयी और सरकार की अधिसूचना को चुनौती देते हुए उस पर रोक लगाने की मांग की गयी।
सरकार के पास भर्ती रद्द करने का अधिकार
जेपीएससी ने अदालत के समक्ष कहा है कि किसी भर्ती प्रक्रिया का एक निश्चित चरण तक पहुंच जाना सरकार के अधिकार को समाप्त नहीं करता। आयोग के अनुसार, राज्य सरकार सार्वजनिक रोजगार से जुड़ी नीतियां बनाने और प्रशासनिक निर्णय लेने के लिए सक्षम प्राधिकारी है।
आयोग ने अपने जवाब में कहा कि यदि किसी भर्ती प्रक्रिया को लेकर परिस्थितियों में बदलाव होता है या प्रशासनिक स्तर पर उसकी समीक्षा की आवश्यकता महसूस होती है, तो सरकार उस प्रक्रिया पर पुनर्विचार कर सकती है। जरूरत पड़ने पर भर्ती प्रक्रिया को समाप्त या रद्द करने का निर्णय भी लिया जा सकता है।
जेपीएससी ने यह भी दलील दी है कि केवल इस आधार पर सरकार के फैसले को चुनौती नहीं दी जा सकती कि भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी थी। आयोग के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया पूरी होने या नियुक्ति होने से पहले तक सरकार के पास परिस्थितियों के अनुसार प्रशासनिक निर्णय लेने का अधिकार बना रहता है। हाईकोर्ट में दाखिल प्रति-शपथ पत्र में जेपीएससी ने कहा है कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सके हैं कि राज्य सरकार की ओर से 18 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर जारी की गयी थी। आयोग ने अदालत से कहा है कि सरकार ने अपनी प्रशासनिक और कार्यकारी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने का फैसला लिया है। इसलिए इस फैसले में हस्तक्षेप करने का आधार नहीं बनता। इन्हीं दलीलों के आधार पर जेपीएससी ने अदालत से याचिका को खारिज करने का अनुरोध किया है।
याचिकाकर्ताओं ने सरकार के फैसले को दी चुनौती
सीडीपीओ भर्ती के अभ्यर्थियों का पक्ष है कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद उसे रद्द किए जाने से उनके हित प्रभावित हुए हैं। इसी वजह से सुभाष मुर्मू और अन्य ने हाईकोर्ट का रुख किया है। याचिका के माध्यम से सरकार की अधिसूचना को चुनौती देते हुए भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मांग की गयी है।
अब मामले में जेपीएससी की ओर से दाखिल प्रति-शपथ पत्र के बाद सरकार के फैसले को लेकर कानूनी स्थिति और महत्वपूर्ण हो गयी है। अदालत दोनों पक्षों की दलीलों और संबंधित दस्तावेजों पर विचार करने के बाद इस मामले में आगे का रुख तय करेगी।
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