खनिज सेस विवाद: झारखंड सरकार 5-6 अक्टूबर को बुला सकती है विधानसभा का विशेष सत्र

NEWS SAGA DESK

खनिजों पर सेस लगाने के राज्यों के अधिकार में कटौती को लेकर झारखंड सरकार केंद्र के खिलाफ 5 और 6 अक्टूबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है। पढ़ें पूरी खबर।

केंद्र सरकार द्वारा खनिजों पर सेस (Cess) लगाने के राज्यों के अधिकारों में किए गए बदलावों को लेकर झारखंड सरकार और केंद्र के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है। इस फैसले के विरोध में झारखंड सरकार अब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की योजना बना रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, आगामी 5 और 6 अक्टूबर को झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र आहुत किया जा सकता है। इस संबंध में औपचारिक प्रस्ताव 25 सितंबर को आयोजित होने वाली राज्य कैबिनेट की बैठक में लाए जाने की प्रबल संभावना है।

केंद्र सरकार द्वारा खनिजों पर सेस

संसदीय रणनीति के तहत, राज्य सरकार इस विशेष सत्र के माध्यम से विधानसभा में इस गंभीर विषय पर विस्तृत चर्चा कराएगी। चर्चा के पश्चात केंद्र के फैसले के विरोध में एक निंदा/विरोध प्रस्ताव पारित कर उसे केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। इसके साथ ही, झारखंड सरकार इस पूरे मामले को देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में भी चुनौती देने की पुरजोर तैयारी कर रही है।

MMDR संशोधन पर झारखंड सरकार की कड़ी आपत्ति

केंद्र सरकार द्वारा ‘मांस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन)’ यानी MMDR Act में किए गए संशोधनों के बाद, राज्यों के खनिज-धारित भूमि (Mineral Bearing Land) पर टैक्स, सेस या अन्य लेवी (Levy) वसूलने के अधिकार प्रभावित हुए हैं। झारखंड सरकार ने इस संशोधन पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

इससे पहले अगस्त महीने में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर इस कानून के वित्तीय, संवैधानिक और संघीय ढांचे (Federal Structure) पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों की ओर ध्यान आकर्षित किया था। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में स्पष्ट किया था कि खनन से मिलने वाला राजस्व झारखंड की वित्तीय रीढ़ है।

राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार:

  • वित्त वर्ष 2024-25 में राज्य की अपनी गैर-कर राजस्व आय (Non-Tax Revenue) में खनन राजस्व की हिस्सेदारी लगभग 84.9 प्रतिशत रही है।
  • ‘मिनरल बेयरिंग लैंड सेस’ से राज्य को हर साल करीब ₹7,110 करोड़ की आय का अनुमान था।
  • केंद्र के इस संशोधन से झारखंड को कुल मिलाकर सालाना लगभग ₹15,000 करोड़ का वित्तीय नुकसान होने का आकलन किया गया है।

मुख्यमंत्री ने पहले ही दिए थे विशेष सत्र के संकेत

केंद्र के इस कदम के खिलाफ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पहले ही आक्रामक रुख अपनाने के संकेत दे दिए थे। 18 अगस्त को हुई कैबिनेट बैठक के बाद ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि राज्य के वित्तीय हितों की रक्षा के लिए विधानसभा में चर्चा कराकर आगे की रणनीति बनाई जाएगी। अब 25 सितंबर की कैबिनेट बैठक में विशेष सत्र की तिथियों पर अंतिम मुहर लग सकती है।

राजनीतिक और कानूनी मोर्चे पर घेराबंदी

इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) भी आक्रामक है और राज्यभर में चरणबद्ध आंदोलन चला रहा है। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर लगातार केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं।

सरकार का तर्क है कि खनिज संपदा से समृद्ध राज्यों के वित्तीय अधिकारों और देश के संघीय ढांचे से जुड़े इतने महत्वपूर्ण विषय पर केंद्र को राज्यों के साथ व्यापक विचार-विमर्श करना चाहिए था। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से इस संशोधन पर पुनर्विचार की अपील की है और साफ किया है कि राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यकता पड़ने पर सभी संवैधानिक और कानूनी रास्ते अपनाए जाएंगे।

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