जमुई छात्रा कांड: आरोपियों की पैरवी नहीं करेंगे वकील

जमुई छात्रा कांड में जिला बार एसोसिएशन ने आरोपियों की पैरवी से इनकार किया है। वकीलों ने स्पीडी ट्रायल और पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग की।

News Saga Desk

बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा से कथित बदसलूकी और छेड़छाड़ के मामले को लेकर जिला बार एसोसिएशन ने बड़ा फैसला लिया है। जमुई छात्रा कांड में जिला विधिज्ञ संघ ने सर्वसम्मति से तय किया है कि मामले के आरोपियों की ओर से कोई भी अधिवक्ता अदालत में पैरवी नहीं करेगा। संघ के अध्यक्ष सीताराम सिंह और महासचिव अमित कुमार ने बैठक के बाद इस संबंध में आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की। इसमें जिले के सभी अधिवक्ताओं से नैतिक आधार पर आरोपियों का बचाव नहीं करने और पीड़िता को न्याय दिलाने में सहयोग करने की अपील की गई है।

क्या है जमुई छात्रा कांड

जमुई छात्रा कांड उस घटना से जुड़ा है, जिसमें एक नाबालिग छात्रा और उसके साथ मौजूद किशोर के साथ कथित तौर पर मारपीट और बदसलूकी की गई थी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में आया। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्रवाई की। रिपोर्टों के मुताबिक मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई है और जांच के लिए एसआईटी गठित की गई थी।

जमुई छात्रा

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपियों की तलाश तेज की। मुख्य आरोपी नंदन यादव पुलिस कार्रवाई के दौरान घायल हुआ और गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई मड़वा पहाड़ क्षेत्र में हुई थी। एनकाउंटर की परिस्थितियों को लेकर पुलिस ने अपनी ओर से जानकारी दी है।

जिला बार एसोसिएशन ने लिया बड़ा फैसला

मामले के सामने आने के बाद जमुई जिला विधिज्ञ संघ ने आरोपियों की कानूनी पैरवी से दूरी बनाने का निर्णय लिया है। अध्यक्ष सीताराम सिंह और महासचिव अमित कुमार ने कहा कि संघ के निर्णय के अनुसार कोई भी अधिवक्ता आरोपियों की ओर से केस नहीं लड़ेगा। दोनों पदाधिकारियों ने अन्य अधिवक्ताओं से भी इसी रुख का पालन करने की अपील की है।

बार एसोसिएशन का कहना है कि पीड़िता और उसके परिवार को जल्द न्याय मिलना प्राथमिकता होनी चाहिए। संघ ने पुलिस और जिला प्रशासन से मामले में प्रभावी और विधि-सम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

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स्पीडी ट्रायल की मांग

जिला बार एसोसिएशन ने जमुई छात्रा कांड में स्पीडी ट्रायल की मांग भी उठाई है। संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, मामले की सुनवाई में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानून के तहत कार्रवाई आगे बढ़नी चाहिए।

वकीलों ने पुलिस और प्रशासन से निष्पक्ष जांच, आवश्यक साक्ष्यों के संरक्षण तथा पीड़िता को जरूरी सुरक्षा और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि त्वरित न्याय प्रक्रिया से पीड़िता और उसके परिवार को लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

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