झारखंड की कृषि प्राथमिकताएं राष्ट्रीय सम्मेलन में उठीं

राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में शिल्पी नेहा तिर्की ने झारखंड की कृषि प्राथमिकताएं रखीं। किसान आईडी में छूट, 90% कृषि सब्सिडी और रबी फसलों के विस्तार की मांग की।

News Saga Desk

रांची/नई दिल्ली। राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में झारखंड की कृषि प्राथमिकताओं को कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने प्रमुखता से उठाया। नई दिल्ली के राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (NASC), पूसा में 28 और 29 सितंबर को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन–रबी अभियान 2026 में उन्होंने राज्य के किसानों की समस्याओं, कृषि विकास की संभावनाओं और केंद्र सरकार से अपेक्षित सहयोग पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने किसान आईडी निर्माण में लचीलापन, कृषि यंत्रीकरण पर 90 प्रतिशत तक सब्सिडी और राइस फॉलो क्षेत्रों के विकास के लिए विशेष पैकेज देने की मांग की।

राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में झारखंड की प्राथमिकताओं पर जोर

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के आह्वान पर आयोजित इस सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री, केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के प्रतिनिधि शामिल हुए।

सम्मेलन में शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि झारखंड की भौगोलिक, सामाजिक और कृषि संबंधी परिस्थितियां दूसरे राज्यों से अलग हैं। ऐसे में केंद्र सरकार की कृषि योजनाओं को लागू करते समय राज्य की स्थानीय जरूरतों और किसानों की वास्तविक समस्याओं को ध्यान में रखना आवश्यक है। उन्होंने योजनाओं के क्रियान्वयन में विशेष लचीलापन और वित्तीय एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह किया।

किसान आईडी निर्माण में लचीलापन देने की मांग

मंत्री ने AgriStack के तहत किसान आईडी (Farmer ID) बनाने में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि झारखंड में पुराने भूमि अभिलेख और वर्तमान जमीन की स्थिति में काफी अंतर है। राज्य में अंतिम व्यापक भूमि सर्वेक्षण वर्ष 1932 में हुआ था। इसके कारण किसानों की जमीन से संबंधित जानकारी का सत्यापन और किसान आईडी तैयार करने की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

झारखंड

उन्होंने केंद्र सरकार से झारखंड की भूमि अभिलेख संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए किसान आईडी निर्माण में विशेष छूट और लचीलापन देने का अनुरोध किया। साथ ही कहा कि जब तक बड़ी संख्या में किसानों की आईडी नहीं बन जाती, तब तक इसे पीएम-किसान (PM-KISAN) सहित अन्य आवश्यक कृषि योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए अनिवार्य शर्त नहीं बनाया जाना चाहिए।

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राइस फॉलो क्षेत्र में 50 हजार हेक्टेयर विस्तार का प्रस्ताव

राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में मंत्री ने झारखंड के राइस फॉलो क्षेत्रों को कृषि विकास की महत्वपूर्ण संभावना बताया। उनके अनुसार, राज्य में रबी मौसम के दौरान लगभग 12 लाख हेक्टेयर राइस फॉलो क्षेत्र उपलब्ध है। इनमें से 5 से 6 लाख हेक्टेयर जमीन पर दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों की खेती की क्षमता है।

उन्होंने इन क्षेत्रों के विकास के लिए केंद्र सरकार से विशेष वित्तीय और तकनीकी पैकेज देने का आग्रह किया। इसके साथ ही आगामी रबी सीजन में 50 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि पर दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों का विस्तार करने का प्रस्ताव रखा। इससे धान की कटाई के बाद खाली रहने वाली जमीन का बेहतर उपयोग करने की संभावना है।

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