जीएम उत्पादों और विदेशी डेयरी के आयात पर भारत सख्त, पीयूष गोयल ने रखी नीति स्पष्ट

NEWS SAGA DESK

Piyush Goyal on GM Products and Dairy Import: वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि भारत डेयरी और जीएम (GM) उत्पादों के आयात को लेकर अपनी सख्त नीति जारी रखेगा। जानें इसके पीछे क्या हैं मुख्य कारण।

भारत सरकार ने आनुवंशिक रूप से संशोधित (Genetically Modified – GM) उत्पादों और विदेशी डेयरी के आयात को लेकर अपने कड़े रुख को एक बार फिर दोहराया है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि भारत ने आज तक कभी भी जीएम उत्पादों के आयात की अनुमति नहीं दी है और भविष्य में भी ऐसा नहीं किया जाएगा।

पीयूष गोयल

नई दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज में छात्रों को संबोधित करते हुए मंत्री पीयूष गोयल ने मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) और भारतीय बाजार से जुड़े कई अहम नीतिगत मुद्दों पर सरकार का दृष्टिकोण देश के सामने रखा।

डेयरी और कृषि क्षेत्र पर नहीं दी जाएगी कोई रियायत

मंत्री पीयूष गोयल ने जोर देकर कहा कि भारत में डेयरी और कृषि क्षेत्र बेहद संवेदनशील हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने अब तक किसी भी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत डेयरी सेक्टर में कोई शुल्क रियायत या छूट नहीं दी है। उन्होंने कहा, “हम अपनी डेयरी को विदेशी बाजार के लिए खोलने को लेकर काफी संवेदनशील हैं। सच तो यह है कि हमने आज तक अपनी डेयरी को किसी के लिए नहीं खोला है। इसी तरह हम किसी भी जीएम उत्पाद को भारत में आने की अनुमति नहीं देते हैं और भविष्य में भी ऐसा कभी नहीं करेंगे।”

व्यापार समझौतों के दौरान सांस्कृतिक और धार्मिक संवेदनाओं का जिक्र करते हुए मंत्री ने बताया कि सरकार इस मामले में बेहद सतर्क रहती है। विदेशों में कई बार डेयरी उत्पाद बनाते समय बछड़े के मांस या ‘रेनेट’ (पनीर निर्माण में प्रयुक्त होने वाला एक एंजाइम, जो पारंपरिक रूप से युवा बछड़ों के पेट से निकाला जाता है) का उपयोग किया जाता है। भारत ऐसे किसी भी उत्पाद को अपने बाजार में आने की अनुमति नहीं देता है। देश की एक बड़ी आबादी की धार्मिक भावनाओं को सुरक्षित रखने के लिए बेहद सख्त सर्टिफिकेशन प्रक्रिया अपनाई जाती है।

किसानों और छोटे कारोबारियों (MSMEs) के हित सर्वोपरि

मंत्री ने यह भी आश्वस्त किया कि भारत ने जिन भी देशों के साथ व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दिया है, उनमें देश के किसानों, मछुआरों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के हितों से कभी समझौता नहीं किया गया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य नए आर्थिक अवसर पैदा करना है ताकि देश का कृषि और एमएसएमई वर्ग बड़े पैमाने पर लाभान्वित हो सके।

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