अग्निपथ योजना के तहत भर्ती पहले बैच के अग्निवीरों का 4 साल का कार्यकाल जल्द पूरा होने वाला है। जानें 25% रिटेंशन नियम और 75% अग्निवीरों के लिए रोजगार के रास्ते।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘अग्निपथ योजना’ के तहत भर्ती हुए अग्निवीरों के पहले बैच के लिए आने वाले 2 से 3 महीने बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं। सेना में चार साल का कार्यकाल पूरा करने की ओर बढ़ रहे इन अग्निवीरों का भविष्य जल्द ही तय होने जा रहा है। नौसेना और वायुसेना के पहले बैच के अग्निवीरों का सेवा काल नवंबर 2026 में पूरा हो रहा है, जबकि थलसेना के पहले बड़े बैच का कार्यकाल दिसंबर 2026 और जनवरी 2027 के आसपास समाप्त होगा।

किन्हें मिलेगा परमानेंट कैडर? 25% रिटेंशन की मौजूदा स्थिति
चार साल की सेवा समाप्त होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि कितने अग्निवीरों को सेना में बरकरार रखा जाएगा। मौजूदा नियमों और दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रत्येक बैच के अधिकतम 25% अग्निवीरों को उनकी योग्यता, शारीरिक दक्षता और चार साल के प्रदर्शन के मूल्यांकन के आधार पर नियमित सैन्य कैडर (Permanent Cadre) में शामिल किया जाएगा। हालांकि, तीनों सेनाओं की ओर से इस रिटेंशन प्रतिशत को बढ़ाने की सिफारिशों पर चर्चा की खबरें लगातार सामने आती रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, भारतीय नौसेना इस सीमा को बढ़ाकर 75% तक करना चाहती है, वहीं थलसेना और वायुसेना इसे 50% तक बढ़ाने के पक्ष में हैं। हालांकि, रक्षा मंत्रालय की ओर से फिलहाल ये केवल प्रस्ताव के स्तर पर हैं और वर्तमान में 25% अग्निवीरों को ही नियमित करने का नियम लागू है।
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