Janmashtami 2026: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के तौर पर मनाई जाने वाली जन्माष्टमी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में शामिल है। इस दिन भक्त भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करते हैं और कई श्रद्धालु उपवास रखते हैं।
NEWS SAGA DESK:
Janmashtami 2026: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के तौर पर मनाई जाने वाली जन्माष्टमी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में शामिल है। इस दिन भक्त भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करते हैं और कई श्रद्धालु उपवास रखते हैं। धार्मिक परंपराओं में जन्माष्टमी के दिन पूजा-पाठ के साथ कुछ विशेष नियमों का पालन करने की बात कही गई है। साथ ही कुछ कार्यों से इस दिन दूरी बनाने की मान्यता है।

जन्माष्टमी पर किन कामों से बचें?
तुलसी के पत्ते न तोड़ें:
धार्मिक मान्यताओं में तुलसी का संबंध भगवान विष्णु और कृष्ण से माना जाता है। जन्माष्टमी के दिन तुलसी की पत्तियां तोड़ने से बचने की परंपरा है। पूजा के लिए जरूरत हो तो तुलसी के पत्ते पहले ही तोड़कर रखे जा सकते हैं।
पेड़-पौधों को नुकसान न पहुंचाएं:
जन्माष्टमी के दिन प्रकृति के प्रति सम्मान रखने की मान्यता है। इसलिए बिना जरूरत पेड़-पौधों की पत्तियां, शाखाएं या फूल तोड़ने और उन्हें नुकसान पहुंचाने से बचने की सलाह दी जाती है।
क्रोध और विवाद से रहें दूर:
जन्माष्टमी को भक्ति और आध्यात्मिक चिंतन का पर्व माना जाता है। ऐसे में इस दिन किसी से झगड़ा करने, अपशब्द बोलने, गुस्सा करने या किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। शांत मन से भगवान कृष्ण का स्मरण करना शुभ माना जाता है।

मांसाहार और नशीले पदार्थों से दूरी:
धार्मिक परंपराओं के अनुसार जन्माष्टमी पर सात्विक आहार और संयमित दिनचर्या का पालन किया जाता है। श्रद्धालु इस दिन मांसाहार और शराब समेत नशीले पदार्थों से दूरी रखते हैं।
जन्माष्टमी की पूजा में इन बातों का रखें ध्यान
जन्माष्टमी के दिन सबसे पहले घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप यानी लड्डू गोपाल की प्रतिमा को स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाएं और उनका श्रृंगार करें।
पूजा में माखन-मिश्री, फल और अन्य सात्विक प्रसाद अर्पित करने की परंपरा है। कई घरों और मंदिरों में भगवान कृष्ण के लिए सुंदर झूला भी सजाया जाता है और उन्हें झूला झुलाया जाता है।

जन्माष्टमी की विशेष पूजा रात में भगवान कृष्ण के जन्म के समय करने की परंपरा है। इस दौरान आरती, भजन और मंत्रोच्चार के साथ कान्हा का स्वागत किया जाता है।
ध्यान रखें: इस लेख में बताई गई बातें धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग स्थानों और परिवारों में जन्माष्टमी से जुड़ी मान्यताएं और पूजा-विधि अलग हो सकती हैं
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