बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए जींस-टीशर्ट पर बैन लगाकर फॉर्मल ड्रेस कोड लागू कर दिया गया है। साथ ही AI का इस्तेमाल बढ़ाने और 10 हजार कर्मचारियों के तबादले की तैयारी है।
बिहार के सरकारी स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों की व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग ने कई बड़े और कड़े फैसले लिए हैं। विभाग ने स्कूलों में अनुशासन और पेशेवर माहौल बनाए रखने के लिए शिक्षकों तथा गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के पहनावे (ड्रेस कोड) को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए निर्देशों के अनुसार, अब राज्य के सभी प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक सरकारी स्कूलों में तैनात शिक्षक और कर्मचारी केवल औपचारिक कपड़ों (फॉर्मल ड्रेस) में ही स्कूल आ सकेंगे। अब कोई भी शिक्षक या कर्मचारी जींस और टी-शर्ट पहनकर विद्यालय में प्रवेश नहीं कर पाएगा।

शिक्षा विभाग के नए अपर मुख्य सचिव, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सीके अनिल ने पदभार संभालते ही इस संबंध में राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को पत्र जारी कर दिया है। जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि इस आदेश का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए और नियम का उल्लंघन करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। शिक्षा विभाग का मानना है कि शिक्षकों के पहनावे का सीधा असर छात्रों के मानस और विद्यालय के शैक्षणिक वातावरण पर पड़ता है, इसलिए गरिमापूर्ण और औपचारिक पोशाक ही विद्यालय की गरिमा के अनुकूल है।
सरकारी स्कूलों में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का बढ़ेगा इस्तेमाल ड्रेस कोड में सख्ती के साथ-साथ बिहार सरकार राज्य की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए भी तत्पर दिखाई दे रही है। शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों और संबंधित शैक्षणिक संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश जारी किए हैं। इस योजना के तहत अधिकारियों, प्राचार्यों और कर्मचारियों को दैनिक प्रशासनिक व शैक्षणिक कार्यों में विभिन्न AI टूल्स का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित किया जाएगा।
विभाग का मानना है कि AI टूल्स की मदद से सरकारी कामकाज को सुगम बनाने, कागजी जटिलताओं को दूर करने, समय की बचत करने और कर्मचारियों की कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ाने में मदद मिलेगी। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी इस नई तकनीक को राज्य के शैक्षणिक ढांचे में शामिल करने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया था। इससे न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि छात्रों के डेटा प्रबंधन और पठन-पाठन की सामग्री तैयार करने में भी सहूलियत होगी।
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