बिहार पंचायत चुनाव में आरक्षण को लेकर पटना हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। मुखिया पद के आरक्षण के लिए बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006 की धारा 15(5) लागू होगी।
बिहार पंचायत चुनाव को लेकर पटना हाईकोर्ट ने आरक्षण व्यवस्था पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पंचायत चुनाव में आरक्षण तय करने के लिए सरकारी नौकरी और सेवाओं में लागू आरक्षण व्यवस्था को सीधे आधार नहीं बनाया जा सकता। खास तौर पर मुखिया पद के चुनाव में आरक्षण का निर्धारण बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 15(5) के तहत किया जाएगा। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि 1991 के बिहार आरक्षण कानून को पंचायत चुनाव में सीट आरक्षण के लिए सीधे लागू नहीं किया जा सकता।

अदालत के इस फैसले को आगामी बिहार पंचायत चुनाव की तैयारियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इससे मुखिया पदों के आरक्षण को लेकर चल रहे विवादों और कानूनी दावों की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।
सहरसा के मुखिया की याचिका पर आया फैसला
यह मामला सहरसा जिले की ग्राम पंचायत राज सहुरिया से जुड़े मुखिया मो. ईसा की याचिका से संबंधित था। मामले की सुनवाई पटना हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की एकलपीठ ने की।
मो. ईसा को मुखिया पद से हटाने की कार्रवाई के पीछे जाति छानबीन समिति की रिपोर्ट को आधार बनाया गया था। इस रिपोर्ट के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने उन्हें पद से हटाने का आदेश जारी किया था। इसके खिलाफ मो. ईसा ने हाईकोर्ट का रुख किया और निर्वाचन आयोग की कार्रवाई को चुनौती दी।
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने निर्वाचन आयोग के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही जाति छानबीन समिति की रिपोर्ट को भी निरस्त कर दिया। अदालत का फैसला 31 पन्नों का बताया गया है।
इसे भी देखें...इरफान अंसारी को MP-MLA कोर्ट से बड़ी राहत, मिली जमानत | राफिया नाज टिप्पणी केस | Jharkhand News
नौकरी और चुनाव के आरक्षण में अंतर साफ
पटना हाईकोर्ट के फैसले का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि बिहार पंचायत चुनाव और सरकारी नौकरियों के आरक्षण को एक ही नजरिए से नहीं देखा जा सकता।
नौकरी में आरक्षण के लिए लागू कानून और पंचायत में चुनावी सीटों के आरक्षण के लिए लागू कानून अलग हैं। इसलिए 1991 के आरक्षण कानून को पंचायत चुनाव की सीटों पर सीधे लागू करने की दलील स्वीकार नहीं की जा सकती।
यह फैसला पंचायत चुनाव से जुड़े संभावित विवादों के लिए भी एक महत्वपूर्ण कानूनी संदर्भ बन सकता है। हालांकि, किसी विशेष पंचायत या पद की आरक्षण स्थिति संबंधित सरकारी प्रक्रिया और आधिकारिक अधिसूचना से ही तय होगी।
No Comment! Be the first one.