मध्य प्रदेश के छतरपुर में एक दुर्लभ जन्मजात विकृति के साथ नवजात का जन्म हुआ। बच्चे के चार हाथ और चार पैर हैं। डॉक्टरों के अनुसार यह हेटेरोपैगस से जुड़ा मामला हो सकता है।
News Saga Desk
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में रविवार सुबह एक बेहद दुर्लभ मामले में चार हाथ और चार पैर वाले नवजात के जन्म की खबर सामने आई है। लवकुशनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 29 वर्षीय नीता अहिरवार ने बच्चे को जन्म दिया। जन्म के बाद नवजात के शरीर पर अतिरिक्त हाथ-पैर और छाती व पेट के ऊपरी हिस्से से जुड़ा एक अतिरिक्त धड़ दिखाई दिया।
नवजात के जन्म की जानकारी मिलते ही अस्पताल में लोगों की भीड़ जुट गई। डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच के आधार पर इसे जुड़वां भ्रूणों के असामान्य विकास से जुड़ा मामला बताया है। हालांकि, बच्चे की वास्तविक शारीरिक स्थिति विशेषज्ञ जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
हेटेरोपैगस से जुड़ा हो सकता है मामला
डॉक्टरों के अनुसार, यह हेटेरोपैगस (Heteropagus) नामक बेहद दुर्लभ जन्मजात स्थिति हो सकती है। इसमें दो भ्रूणों में से एक अपेक्षाकृत सामान्य रूप से विकसित होता है, जबकि दूसरे भ्रूण का विकास पूरी तरह नहीं हो पाता। उसके कुछ विकसित हिस्से पहले भ्रूण के शरीर से जुड़े रह सकते हैं।
ऐसे मामलों में अतिरिक्त अंग या शरीर के अन्य हिस्से दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, इस नवजात के मामले में अतिरिक्त धड़ और अंगों की संरचना तथा मुख्य शरीर से उनके जुड़ाव की स्थिति विस्तृत जांच के बाद ही पता चलेगी।
करीब तीन किलो है नवजात का वजन
जन्म के समय बच्चे का वजन करीब तीन किलोग्राम बताया गया है। फिलहाल मां और नवजात दोनों को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेंद्र गुप्ता के अनुसार, नवजात और उसकी मां को एंबुलेंस से छतरपुर जिला अस्पताल बुलाया गया है। यहां जरूरी जांच और प्राथमिक उपचार के बाद नवजात को एयर एंबुलेंस के जरिए जबलपुर मेडिकल कॉलेज भेजने की तैयारी की जा रही है।
विशेषज्ञ जांच के बाद तय होगा इलाज
जबलपुर मेडिकल कॉलेज में पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. विकेश अग्रवाल विशेषज्ञ जांच करेंगे। डॉक्टर यह पता लगाएंगे कि अतिरिक्त धड़ और अंगों में हड्डियां, रक्त वाहिकाएं और अन्य ऊतक किस तरह विकसित हुए हैं और उनका मुख्य शरीर के आंतरिक अंगों से कोई संबंध है या नहीं।
स्थिति को समझने के लिए डॉक्टर आवश्यकता के अनुसार अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन या एमआरआई जैसी जांच करा सकते हैं। इन जांचों के आधार पर ही आगे के उपचार की रणनीति तय की जाएगी।
सर्जरी पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं
फिलहाल नवजात की सर्जरी को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। विशेषज्ञों की विस्तृत जांच के बाद यह तय होगा कि अतिरिक्त हिस्सों को अलग करना संभव है या नहीं और ऐसा करना बच्चे के लिए कितना सुरक्षित होगा।
डॉक्टरों के मुताबिक, इस तरह के दुर्लभ मामलों में उपचार का निर्णय बच्चे की शारीरिक संरचना, रक्त वाहिकाओं और आंतरिक अंगों से अतिरिक्त हिस्सों के संबंध सहित कई चिकित्सकीय पहलुओं की जांच के बाद लिया जाता है।
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