News Saga Desk
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के पूर्व राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा के बहाने बिहार की राजनीति में नए समीकरण बनाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव जो कल तक तेजस्वी को अनुभवहीन, परिवारवादी जैसी उपमाओं से विभूषित कर रहे थे अचानक वे अब तेजस्वी यादव से रिश्ते सुधारने में लग गए हैं।
पप्पू यादव ने सार्वजनिक मंच से तेजस्वी को “जननायक” की संज्ञा देते हुए उनकी नेतृत्व क्षमता और युवाओं में पकड़ की सराहना की है। पप्पू यादव के इस कदम को राजनीतिक हलकों में चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि पप्पू यादव का यह यह रुख न केवल व्यक्तिगत रिश्तों को बेहतर बनाने के प्रयास हैं, बल्कि 2025 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर राजनीतिक जमीन मजबूत करने की रणनीति भी है। जानकार मानते हैं पप्पू यादव का तेजस्वी के करीब आना विपक्षी एकजुटता को और मजबूत कर सकता है।
पप्पू हमेशा करते रहे हैं तेजस्वी का विरोध
पप्पू यादव सदैव तेजस्वी यादव का विरोध करते रहे हैं। 2015 के चुनाव के बाद उन्होंने तेजस्वी को अनुभवहीन नेता बताया था। 2029 लोकसभा चुनाव के बाद तेजस्वी पर नेतृत्व की नाकामी का आरोप लगाया। नीतीश कुमार के 2017 में जब राजद अलग हुए तो पप्पू यादव ने कहा था कि तेजस्वी ने ईमानदारी से अपनी भूमिका का निर्वहन नहीं किया।
तेजस्वी भी पप्पू को नहीं करते पसंद
यहां बता दें कि 2024 लोकसभा चुनाव में जब पप्पू यादव पूर्णिया से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे तेजस्वी यादव ने उनका विरोध करते हुए जनसभा में कहा था दो गठबंधन चुनाव लड़ रहे हैं। हमें नहीं वोट करना है तो दूसरे गठबंधन को वोट कर दें।
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