JMM ने खेला बड़ा दांव! बैद्यनाथ राम बने राज्यसभा उम्मीदवार, कांग्रेस की बढ़ी टेंशन
झारखंड में राज्यसभा चुनाव से पहले इंडिया गठबंधन के सहयोगियों JMM और कांग्रेस में दरार गहरी हो गई है। कांग्रेस द्वारा प्रणव झा को प्रत्याशी घोषित करने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पार्टी नेताओं की हाई-लेवल मीटिंग बुलाई। JMM ने इसे एकतरफा फैसला बताते हुए दोनों सीटों पर चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं।
News Saga Desk
रांची: झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल चरम पर पहुंच गई है। कांग्रेस द्वारा मल्लिकार्जुन खरगे के राजनीतिक सलाहकार प्रणव झा को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद शुरू हुआ विवाद अब और गहरा गया है। इस बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने भी अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। पार्टी ने वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम को राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है।
झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने बैद्यनाथ राम के नाम की औपचारिक घोषणा की। बैद्यनाथ राम लातेहार क्षेत्र से कई बार विधायक रह चुके हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में उनकी गिनती होती है। अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले बैद्यनाथ राम वर्तमान में झामुमो के उपाध्यक्ष हैं। उन्हें शासन और प्रशासन का लंबा अनुभव है। हेमंत सोरेन सरकार के साथ-साथ पूर्व भाजपा सरकार में भी वह मंत्री पद की जिम्मेदारी निभा चुके हैं।
जानकारी के अनुसार बैद्यनाथ राम सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल करेंगे। झामुमो द्वारा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद राज्यसभा चुनाव का राजनीतिक समीकरण और दिलचस्प हो गया है।
कांग्रेस के फैसले से नाराज झामुमो
कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार के रूप में प्रणव झा के नाम का ऐलान किया है। लेकिन झामुमो ने इसे एकतरफा फैसला बताते हुए नाराजगी जाहिर की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राज्य में सरकार का नेतृत्व झामुमो कर रही है, इसलिए राज्यसभा की दोनों सीटों पर उसका स्वाभाविक दावा बनता है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कांग्रेस के फैसले के बाद अपने कई सरकारी कार्यक्रम रद्द कर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की बैठक बुलाई। बैठक में अधिकांश नेताओं ने राय दी कि झामुमो को दोनों सीटों पर दावा करना चाहिए। अंतिम निर्णय के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया गया।
समझिए पूरा गणित
झारखंड विधानसभा में कुल 81 विधायक हैं और राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए लगभग 28 वोटों की जरूरत होती है।
- झामुमो के पास 34 विधायक हैं, जिससे एक उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
- कांग्रेस के पास 16 विधायक हैं। राजद और माले का समर्थन जोड़ने पर यह संख्या 22 तक पहुंचती है।
- भाजपा और उसके सहयोगियों के पास करीब 24 वोट हैं।
अब यदि झामुमो, कांग्रेस और भाजपा तीनों अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतारते हैं तो मुकाबला बेहद रोचक हो सकता है।
दूसरी वरीयता के वोट होंगे निर्णायक
राज्यसभा चुनाव में दूसरी वरीयता यानी सेकेंड प्रेफरेंस वोट भी काफी महत्वपूर्ण होते हैं। यदि किसी उम्मीदवार को पहली वरीयता के आधार पर आवश्यक वोट नहीं मिलते, तो दूसरी पसंद के वोटों की गिनती होती है। ऐसे में अतिरिक्त वोट रखने वाले दल चुनाव का परिणाम प्रभावित कर सकते हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि मुकाबला त्रिकोणीय हुआ तो जीत-हार का फैसला दूसरी वरीयता के वोटों से हो सकता है।
गठबंधन के सामने चुनौती
झामुमो द्वारा बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद अब नजर कांग्रेस के अगले कदम पर है। यदि दोनों दल अपने-अपने उम्मीदवारों पर अड़े रहते हैं तो इंडिया गठबंधन के भीतर तनाव और बढ़ सकता है। हालांकि दोनों दल फिलहाल गठबंधन को लेकर सार्वजनिक तौर पर कोई सख्त बयान नहीं दे रहे हैं।
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