NEWS SAGA DESK
तिरुवनंतपुरम : प्रवर्तन निदेशालय ने सीएमआरएल-एक्सालॉजिक वित्तीय लेनदेन से जुड़े धन शोधन मामले में बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए पिनाराई विजयन, उनकी बेटी वीना विजयन और दामाद पीए मोहम्मद रियास से जुड़े कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई केरल उच्च न्यायालय द्वारा जांच और समन को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज किए जाने के एक दिन बाद की गई।
अधिकारियों ने तिरुवनंतपुरम के बेकरी जंक्शन स्थित विजयन के किराये के आवास और कन्नूर स्थित उनके पैतृक घर की तलाशी ली। इसके अलावा कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड के प्रबंध निदेशक शशिधरन कर्ता के आवास, पीए मोहम्मद रियास के कोझिकोड स्थित घर और वीना विजयन की कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस के बेंगलुरु कार्यालय में भी छापेमारी की गई। सूत्रों के अनुसार केरल और कर्नाटक में कुल 12 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया।
सूत्रों के मुताबिक तड़के भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जब ईडी की टीम तिरुवनंतपुरम स्थित आवास पहुंची, उस समय पिनाराई विजयन, वीना विजयन और परिवार के अन्य सदस्य घर में मौजूद थे। अधिकारियों ने कई दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की। हालांकि जब्त सामग्री और पूछताछ को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।
यह मामला सीएमआरएल और एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस के बीच हुए वित्तीय लेनदेन से जुड़े कथित धन शोधन का है। आयकर अंतरिम निपटान बोर्ड की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सीएमआरएल ने एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को “परामर्श सेवाओं” के नाम पर लगभग 1.72 करोड़ रुपये का भुगतान किया, जबकि कथित तौर पर कोई सेवा प्रदान नहीं की गई थी। विपक्षी दलों ने इस भुगतान को “मासिक भुगतान” बताते हुए भ्रष्टाचार और प्रभाव के दुरुपयोग का आरोप लगाया था।
सीएमआरएल और उसके अधिकारियों ने जांच और समन को अदालत में चुनौती देते हुए कहा था कि आयकर निपटान बोर्ड से राहत मिलने के बाद धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई उचित नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया था कि ईडी के पास समन जारी करने और जांच आगे बढ़ाने का वैधानिक अधिकार नहीं है।
हालांकि केरल उच्च न्यायालय ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि आयकर मामलों में राहत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि धन शोधन के आरोपों की जांच नहीं की जा सकती। न्यायमूर्ति टीआर रवि ने कहा कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और इस स्तर पर समन को चुनौती देना समयपूर्व होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ईडी को धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत जांच शुरू करने के लिए अलग से प्राथमिकी दर्ज होने की आवश्यकता नहीं होती।
उच्च न्यायालय के आदेश के अगले ही दिन शुरू हुई इस व्यापक छापेमारी ने मामले को राजनीतिक रूप से और अधिक संवेदनशील बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में केरल की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है, क्योंकि यह सीधे राज्य के शीर्ष राजनीतिक परिवार से जुड़ा हुआ है।
विपक्षी दलों ने मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि वाम लोकतांत्रिक मोर्चा के नेताओं ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बताया है। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि एजेंसी कानून के अनुसार कार्रवाई कर रही है और मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए।
फिलहाल छापेमारी और दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई अहम खुलासे हो सकते हैं और संबंधित लोगों से विस्तृत पूछताछ भी की जा सकती है।
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