कोलकाता नगर निगम में वार्ड बढ़ाने का बिल पास, 209 होंगे वार्ड

कोलकाता नगर निगम में वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 करने का बिल विधानसभा में पास हो गया। सरकार ने कहा कि परिसीमन बाद में किया जाएगा।

News Saga Desk

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा में बुधवार को कोलकाता नगर निगम में वार्ड बढ़ाने का बिल ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। कोलकाता म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (अमेंडमेंट) बिल, 2026 के जरिए नगर निगम में निर्वाचित पार्षदों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 करने का प्रस्ताव है। विधेयक शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने सदन में पेश किया, जिस पर चर्चा के बाद विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस ने मतदान की प्रक्रिया कराई और इसे ध्वनिमत से मंजूरी मिल गई।

विधेयक पारित होने के बाद अब कोलकाता नगर निगम में वार्डों की संख्या बढ़ाने की दिशा में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि वार्डों की सीमाएं और प्रत्येक वार्ड में मतदाताओं की संख्या का अंतिम निर्धारण तत्काल नहीं होगा।

144 से बढ़कर 209 होगी पार्षदों की संख्या

कोलकाता नगर निगम में वार्ड बढ़ाने का बिल नगर निगम अधिनियम, 1980 की धारा-5 में संशोधन से जुड़ा है। प्रस्तावित संशोधन के तहत निगम में निर्वाचित पार्षदों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 करने का प्रावधान किया गया है।

सरकार की ओर से बताया गया कि यह बदलाव वार्डवार आबादी, आवासीय स्वरूप, भौगोलिक परिस्थितियों और निगम से जुड़े आर्थिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। यानी वार्डों की संख्या बढ़ाने के पीछे केवल प्रशासनिक विस्तार ही नहीं, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों की आबादी और स्थानीय परिस्थितियों को भी आधार बनाया जाएगा।

विधेयक के लागू होने की तारीख राज्य सरकार की ओर से राजपत्र में अधिसूचना जारी करके तय की जाएगी।

परिसीमन बाद की प्रक्रिया में होगा

विधानसभा में चर्चा के दौरान सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि कोलकाता नगर निगम में वार्ड बढ़ाने का बिल पारित होने का मतलब यह नहीं है कि नए वार्डों की सीमाएं तुरंत तय हो जाएंगी।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि फिलहाल विधेयक के जरिए वार्डों की संख्या बढ़ाई जा रही है। वार्डों की सीमाओं और मतदाताओं की संख्या से संबंधित अंतिम फैसला बाद की प्रक्रिया में होगा।

उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग वार्डों की सीमाओं और मतदाता संख्या से जुड़े विषयों पर दो सर्वदलीय बैठकें करेगा। इन बैठकों में राजनीतिक दलों से सुझाव लिए जाएंगे। सुझावों और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर परिसीमन किया जाएगा। इसके बाद अंतिम सूची प्रकाशित की जाएगी।

सभी पक्षों ने चर्चा में रखी अपनी बात

विधेयक पर विधानसभा में विस्तृत चर्चा हुई। सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई सदस्यों ने इस प्रस्ताव को लेकर अपने विचार रखे। चर्चा में तृणमूल कांग्रेस के शोभनदेव चटर्जी, जावेद अहमद खान और फिरहाद हकीम समेत कई सदस्यों ने हिस्सा लिया।

वहीं भाजपा की ओर से रितेश तिवारी, शंकर सिकदर, सरबरी मुखर्जी और सजल घोष सहित अन्य सदस्यों ने अपनी बात रखी। मंत्री अरूप कुमार दास और शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल भी चर्चा में शामिल हुए।

नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने भी चर्चा में भाग लिया और परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया।

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आबादी और भौगोलिक स्थिति बनेगी आधार

विधेयक के उद्देश्यों और कारणों में वार्डों की संख्या में बदलाव के पीछे कई आधार बताए गए हैं। इनमें वार्डवार आबादी, आवासीय स्वरूप और भौगोलिक परिस्थितियां प्रमुख हैं। इसके अलावा नगर निगम से जुड़े आर्थिक पहलुओं को भी ध्यान में रखने की बात कही गई है।

कोलकाता नगर निगम में वार्ड बढ़ाने का बिल ऐसे समय पारित हुआ है, जब शहर के प्रशासनिक ढांचे को लेकर नए सिरे से बदलाव की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। वार्डों की संख्या बढ़ने के बाद परिसीमन के जरिए उनकी सीमाओं को नए तरीके से निर्धारित किया जाएगा।

 कोलकाता नगर

सरकार के मुताबिक चुनाव आयोग की प्रस्तावित सर्वदलीय बैठकों में राजनीतिक दल अपने सुझाव रख सकेंगे। इसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस प्रक्रिया के दौरान वार्डों की सीमाओं और मतदाताओं की संख्या से जुड़े प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे।

अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मौजूदा क्षेत्रों का पुनर्गठन किस तरह किया गया है और नए वार्ड किन भौगोलिक सीमाओं के आधार पर बनाए जाएंगे।

इसलिए कोलकाता नगर निगम में वार्ड बढ़ाने का बिल पारित होना अभी पूरी प्रक्रिया का पहला महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। आगे परिसीमन और अंतिम अधिसूचना के बाद नगर निगम के नए स्वरूप की तस्वीर साफ होगी।

विधेयक के अनुसार इसके प्रावधान कब से प्रभावी होंगे, यह राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना के जरिए तय करेगी। यानी विधानसभा से मंजूरी मिलने के बाद भी इसके क्रियान्वयन से जुड़े अगले प्रशासनिक कदम महत्वपूर्ण होंगे।

फिलहाल 144 निर्वाचित पार्षदों वाले कोलकाता नगर निगम में संख्या बढ़ाकर 209 करने का रास्ता साफ हो गया है। कोलकाता नगर निगम में वार्ड बढ़ाने का बिल पारित होने के बाद अब सभी की नजर परिसीमन की आगामी प्रक्रिया और चुनाव आयोग की सर्वदलीय बैठकों पर रहेगी। इन्हीं चरणों के बाद नए वार्डों की वास्तविक सीमाएं और मतदाता संरचना सामने आएगी।

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