नौसेना के तीसरे अगली पीढ़ी के गश्ती पोत का जलावतरण कल

अगली पीढ़ी का गश्ती पोत 11 अगस्त को कोलकाता में लॉन्च होगा। एनजीओपीवी की लंबाई 113 मीटर और गति 23 समुद्री मील होगी, 2028 से मिलेंगे पोत।

News Saga Desk

भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। अगली पीढ़ी का गश्ती पोत परियोजना के तहत तीसरे एनजीओपीवी का जलावतरण मंगलवार, 11 अगस्त को कोलकाता में किया जाएगा। भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे 11 अगली पीढ़ी के गश्ती पोतों में यह तीसरा पोत होगा। इसका निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) द्वारा किया जा रहा है।

जीआरएसई की ओर से सोमवार को जारी जानकारी के मुताबिक, कोलकाता स्थित शिपयार्ड में होने वाले जलावतरण समारोह में भारतीय नौसेना के युद्धपोत उत्पादन एवं अधिग्रहण नियंत्रक वाइस एडमिरल संजय साधु मुख्य अतिथि होंगे। उनकी पत्नी मणिका साधु पोत का जलावतरण करेंगी।

तीसरे एनजीओपीवी का कल होगा जलावतरण

यह जीआरएसई द्वारा बनाया जा रहा दूसरा अगली पीढ़ी का गश्ती पोत होगा। इससे पहले 20 मई को जीआरएसई ने ‘संघमित्रा’ नामक पोत का जलावतरण किया था। वहीं, गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने अपने हिस्से के सात एनजीओपीवी में से एक पोत का 31 मार्च 2026 को जलावतरण किया था। इस पोत का नाम ‘शाची’ रखा गया है।

एनजीओपीवी परियोजना के तहत कुल 11 आधुनिक गश्ती पोत तैयार किए जा रहे हैं। इस परियोजना का उद्देश्य नौसेना के समुद्री निगरानी और सुरक्षा तंत्र को अधिक आधुनिक और सक्षम बनाना है।

2028 से नौसेना को मिलने लगेंगे पोत

नौसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, एनजीओपीवी परियोजना तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रही है। तीन पोतों के निर्माण के बाद अब इन्हें आवश्यक उपकरणों और आधुनिक प्रणालियों से लैस करने का काम शुरू होगा।

 नौसेना

अधिकारी ने बताया कि इन पोतों की नौसेना को आपूर्ति 2028 से शुरू होने की उम्मीद है। इन आधुनिक जहाजों के बेड़े में शामिल होने से नौसेना की समुद्री निगरानी और विभिन्न अभियानों को अंजाम देने की क्षमता बढ़ेगी। साथ ही, इससे नौसेना के 200 युद्धपोतों के बेड़े के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।

मौजूदा गश्ती पोतों से अधिक आधुनिक

अगली पीढ़ी का गश्ती पोत मौजूदा गश्ती पोतों की तुलना में अधिक उन्नत क्षमताओं से लैस होगा। इनमें बेहतर गुप्त संचालन क्षमता, लंबे समय तक समुद्र में रहने की क्षमता और आधुनिक उपकरण एवं हथियार शामिल होंगे।

इन पोतों को बहुउद्देश्यीय समुद्री अभियानों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। भविष्य में नौसेना के लिए बनाए जाने वाले अन्य युद्धपोतों में भी अगली पीढ़ी की तकनीक को प्राथमिकता दी जाएगी। इनमें कार्वेट, फ्रिगेट, सर्वे पोत और विध्वंसक जैसे युद्धपोत शामिल हैं।

113 मीटर लंबा और 23 समुद्री मील की रफ्तार

एनजीओपीवी की लंबाई करीब 113 मीटर और चौड़ाई लगभग 14.6 मीटर होगी। इनका विस्थापन करीब 3,000 टन रहने का अनुमान है। ये पोत अधिकतम 23 समुद्री मील की गति से चल सकेंगे।

14 समुद्री मील की गति पर इनकी समुद्री सहनशक्ति करीब 8,500 समुद्री मील होगी। करीब चार मीटर के कम गहरे पानी में संचालन की क्षमता के कारण ये पोत तटीय इलाकों में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकेंगे।

यह क्षमता इन्हें समुद्री निगरानी और तटीय सुरक्षा से जुड़े अभियानों के लिए खास तौर पर उपयोगी बनाएगी।

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समुद्री निगरानी से तस्करी रोकने तक काम

अगली पीढ़ी का गश्ती पोत समुद्र में स्थित महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की सुरक्षा, समुद्री निगरानी और संदिग्ध गतिविधियों पर कार्रवाई के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। जहाज पर चढ़कर तलाशी और जब्ती जैसे अभियानों में भी इनकी भूमिका होगी।

इसके अलावा एनजीओपीवी समुद्री क्षेत्र में नौसेना की निरंतर मौजूदगी बनाए रखने और बारूदी सुरंग युद्ध अभियानों में सहायता करने में सक्षम होंगे। विशेष अभियानों के दौरान भी इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।

इन पोतों को दूरदराज के क्षेत्रों में आकस्मिक अभियानों, गैर-लड़ाकू नागरिकों की निकासी और काफिला संचालन के लिए भी तैयार किया गया है। समुद्री डकैती रोधी अभियानों तथा घुसपैठ रोधी कार्रवाई में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।

समुद्री क्षेत्र में अवैध शिकार करने वालों और तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के लिए भी इन पोतों का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे समुद्री कानून लागू करने और समुद्री क्षेत्र में निगरानी मजबूत करने में मदद मिलेगी।

एनजीओपीवी की उपयोगिता सिर्फ सैन्य अभियानों तक सीमित नहीं होगी। प्राकृतिक आपदा या अन्य आपात स्थिति में मानवीय सहायता और राहत पहुंचाने के साथ-साथ खोज एवं बचाव अभियानों में भी इनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

जरूरत पड़ने पर अगली पीढ़ी का गश्ती पोत अस्पताल पोत और संचार खुफिया पोत के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके अलावा ये नौसेना के बेड़े के रखरखाव से जुड़ी सहायता प्रदान करने में भी सक्षम होंगे।

11 अगस्त को होने वाला जलावतरण एनजीओपीवी परियोजना की प्रगति में महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। 2028 से इन पोतों की आपूर्ति शुरू होने के बाद भारतीय नौसेना को समुद्री निगरानी, तटीय सुरक्षा, बचाव अभियान और विभिन्न समुद्री ऑपरेशन के लिए आधुनिक प्लेटफॉर्म मिलेंगे।

अगली पीढ़ी का गश्ती पोत भारतीय नौसेना के भविष्य के आधुनिक बेड़े का हिस्सा होगा। 11 पोतों की पूरी परियोजना के आगे बढ़ने से नौसेना की समुद्री उपस्थिति और बहुउद्देश्यीय अभियान क्षमता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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