पलामू टाइगर रिजर्व में मानसून का अद्भुत नजारा

NEWS SAGA DESK

पलामू टाइगर रिजर्व में मानसून ने नदियों और झरनों की खूबसूरती बढ़ा दी है। केचकी संगम, मिर्चइया, सुग्गा बांध और लोध फॉल आकर्षण बने हैं।

झारखंड में लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने पलामू टाइगर रिजर्व के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को नया जीवन दे दिया है। घने जंगलों के बीच बहती नदियां और ऊंचाई से गिरते झरने इन दिनों पूरे शबाब पर हैं। केचकी संगम से लेकर मिर्चइया जलप्रपात, सुग्गा बांध और प्रसिद्ध लोध फॉल तक बारिश के बाद प्रकृति का अलग ही रूप देखने को मिल रहा है। हरियाली, बादलों, पहाड़ियों और उफनती जलधाराओं का यह नजारा प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफरों को आकर्षित कर रहा है।

पलामू टाइगर रिजर्व

केचकी संगम पर दिख रहा नदी का रौद्र रूप

पलामू और लातेहार जिलों की सीमा पर स्थित केचकी संगम मानसून में खास आकर्षण का केंद्र बन गया है। यहां उत्तर कोयल और औरंगा नदियों का संगम होता है। बारिश के कारण दोनों नदियों का जलस्तर बढ़ने से संगम स्थल पर पानी की तेज धाराएं और उनकी गर्जना रोमांच पैदा कर रही हैं।

केचकी का ऐतिहासिक महत्व भी है। इसी इलाके में महान फिल्म निर्देशक सत्यजीत रे ने अपनी चर्चित बंगाली फिल्म ‘अरन्येर दिनरात्रि’ की शूटिंग की थी। यहां मौजूद पुराना ब्रिटिश फॉरेस्ट बंगला भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है।

मानसून में चारों तरफ फैली हरियाली, बादलों से घिरी पहाड़ियां और नदियों का उफान इस क्षेत्र को खास बना रहा है। यही वजह है कि फोटोग्राफी और प्रकृति प्रेमियों के बीच केचकी की लोकप्रियता बढ़ी है।

मिर्चइया फॉल में दूधिया पानी का नजारा

लातेहार जिले के गारू प्रखंड से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित मिर्चइया जलप्रपात इन दिनों पर्यटकों को खूब आकर्षित कर रहा है। घने जंगल के बीच स्थित यह जलप्रपात उत्तर कोयल नदी की सहायक नदी पर बना है।

काली ग्रेनाइट चट्टानों और लावा डोम के ऊपर से बहता पानी जब नीचे गिरता है तो सफेद दूधिया धारा का मनमोहक दृश्य बनता है। यहां वन विभाग की ओर से पर्यटकों के लिए लकड़ी का पुल भी बनाया गया है, जहां से जलप्रपात और आसपास के प्राकृतिक दृश्य देखे जा सकते हैं।

पलामू टाइगर रिजर्व

सुग्गा बांध जलप्रपात में शांति और हरियाली

बेतला से नेतरहाट जाने वाले मार्ग पर बारेसांड के आसपास स्थित सुग्गा बांध जलप्रपात अपेक्षाकृत शांत और प्राकृतिक वातावरण के लिए जाना जाता है। घने साल जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित यह जलप्रपात मानसून में और अधिक आकर्षक नजर आता है।

उत्तर कोयल नदी प्रणाली से जुड़े इस झरने की जलधारा ऊंचाई से नीचे पथरीले हिस्से में गिरती है। यहां साफ पानी, घना जंगल और पहाड़ी वातावरण पर्यटकों को शहर की भागदौड़ से दूर सुकून का अनुभव कराता है।143 मीटर ऊंचा लोध फॉल बना मुख्य आकर्षण महुआडांड़ प्रखंड में बूढ़ा नदी पर स्थित बूढ़ा घाघ, जिसे लोध फॉल के नाम से भी जाना जाता है, मानसून में अपने सबसे प्रभावशाली रूप में दिखाई देता है। करीब 143 मीटर यानी लगभग 469 फीट की ऊंचाई से गिरने वाला यह झरना झारखंड के सबसे ऊंचे जलप्रपातों में शामिल है।

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