बच्चा खाना खाने से करे इनकार, तो न करें जबरदस्ती; ऐसे समझें उसकी भूख के संकेत

NEWS SAGA DESK

क्या आपका बच्चा भी थोड़ा सा खाना खाकर ‘पेट भर गया’ कह देता है? हर बार प्लेट खत्म करने का दबाव बनाना बच्चों के लिए सही नहीं है। जानिए बच्चों की भूख और पेट भरने के संकेतों को कैसे समझें।

बच्चों को खाना खिलाना कई माता-पिता के लिए एक रोजमर्रा की बड़ी चुनौती बन जाता है। अक्सर ऐसा होता है कि बच्चा महज कुछ ही कौर खाने के बाद यह कह देता है कि “मेरा पेट भर गया, अब और नहीं खाना।” यह सुनते ही माता-पिता की चिंता बढ़ जाती है कि बच्चा इतना कम खाकर कैसे रहेगा? इसके बाद वे उसे मनाने या थोड़ा और खिलाने की कोशिश करने लगते हैं। कई बार बच्चे के साफ मना करने के बावजूद उसे जबरदस्ती या बहला-फुलाकर खिलाया जाता है।

 "मेरा पेट भर गया, अब और नहीं खाना।"

लेकिन यह समस्या केवल एक-दो घरों की नहीं, बल्कि ज्यादातर माता-पिता की है। हर बार थाली में खाना बचने का मतलब यह बिल्कुल नहीं होता कि बच्चे ने कम खाया है। कई बार बच्चा इसलिए खाना छोड़ देता है क्योंकि उसका पेट पूरी तरह भर चुका होता है। ऐसे में यह समझना बहुत जरूरी है कि बच्चा कब सच में भूखा है और कब उसका पेट भर चुका है।

हर दिन एक जैसी नहीं होती बच्चे की भूख

बच्चों की भूख बड़ों की तरह हर दिन एक जैसी नहीं रहती। जिस दिन बच्चा ज्यादा खेला हो, ज्यादा दौड़ा-भागा हो या काफी देर से कुछ नहीं खाया हो, उस दिन उसे अधिक भूख लग सकती है। वहीं, किसी दूसरे दिन उसकी एक्टिविटी कम होने या अन्य कारणों से वह कम खाना खा सकता है।

बच्चे की नींद, तबीयत और बीच में खाई गई चीजों का भी उसकी भूख पर गहरा असर पड़ता है। इसलिए अगर बच्चा एक दिन दो रोटी खाता है और अगले दिन एक रोटी खाने के बाद ही पेट भरने की बात कहता है, तो यह मान लेना सही नहीं है कि वह आनाकानी कर रहा है। माता-पिता को केवल एक वक्त की प्लेट देखने के बजाय यह देखना चाहिए कि बच्चा पूरे दिन में कुल कितना और क्या खा रहा है।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (AAP) के अनुसार, माता-पिता की मुख्य जिम्मेदारी यह है कि वे बच्चे के सामने न्यूट्रिशियस और उसकी उम्र के हिसाब से सही मात्रा में भोजन रखें। बच्चा उसमें से कितना खाना चाहता है, यह पूरी तरह उसकी भूख पर निर्भर करता है।

कैसे समझें कि बच्चे का पेट भर गया है?

छोटे बच्चे बोलकर यह नहीं बता पाते कि उनका पेट भर गया है, लेकिन वे अपने व्यवहार से इसके स्पष्ट संकेत देते हैं:

  • खाना धीरे-धीरे खाना या मुंह बंद कर लेना।
  • खाने की प्लेट को दूर सरका देना या सिर दूसरी तरफ घुमा लेना।
  • खाने के प्रति दिलचस्पी कम कर देना।

ये सारे संकेत बताते हैं कि अब बच्चे को और भोजन की आवश्यकता नहीं है। इसके विपरीत, अगर बच्चा खाने की तरफ खुद बढ़ रहा है, खाना देखकर उत्साहित हो रहा है या और मांग रहा है, तो यह उसकी भूख के संकेत हैं।

विशेषज्ञों द्वारा इस तरीके को ‘रिस्पॉन्सिव फीडिंग’ (Responsive Feeding) कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि बच्चे की भूख और पेट भरने के संकेतों को समझकर उसी के अनुसार उसे भोजन देना।

“प्लेट खत्म करो” कहना क्यों सही तरीका नहीं है?

माता-पिता अक्सर प्यार या फिक्र के कारण बच्चे को पूरी प्लेट खत्म करने का दबाव बनाते हैं, ताकि उसे पूरा पोषण मिल सके। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, बच्चे को उसकी भूख से ज्यादा खाने के लिए मजबूर करना सही नहीं है। बच्चों को धैर्य के साथ और प्यार से मोटिवेट करना चाहिए, न कि उनके साथ जबरदस्ती करनी चाहिए।

शुरुआत में बच्चे की प्लेट में बहुत ज्यादा खाना परोसने से बचें। हमेशा कम मात्रा में खाना दें और अगर बच्चा मांगे तो दोबारा परोसें। इससे बच्चा अपनी भूख के हिसाब से खाना सीखता है और खाना भी बर्बाद नहीं होता।

खाने के समय इन बातों का रखें खास ध्यान
  1. बार-बार टोकने से बचें: खाने की टेबल पर “सीधे बैठो”, “जल्दी खाओ” या “सब्जी खत्म करो” जैसी बातें बार-बार न कहें। इससे खाना बच्चे के लिए तनाव का कारण बन सकता है।
  2. स्क्रीन टाइम से दूरी: खाना खिलाते समय मोबाइल या टीवी जैसी ध्यान भटकाने वाली चीजों को दूर रखें, ताकि बच्चा खाने के स्वाद और अपनी भूख पर ध्यान दे सके।
  3. तुरंत हार न मानें: यदि बच्चा कोई विशेष सब्जी या चीज खाने से मना करे, तो उसे डांटने के बजाय कुछ दिनों बाद किसी दूसरे रूप या स्वाद में परोसकर ट्राई करें।

Read More News

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने ओडिशा के नवनियुक्त राज्यपाल ब्रजमोहन राम से की मुलाकात

झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने रांची में ओडिशा के नवनियुक्त राज्यपाल ब्रजमोहन राम से...

Read More