रांची अपहरण मामला में पुलिस ने दो घंटे के भीतर अपहृत युवक को सकुशल बरामद कर लिया। 10 लाख की फिरौती मांगने के आरोप में तीन आरोपी गिरफ्तार, स्कॉर्पियो भी जब्त।
रांची अपहरण मामला ने राजधानी में सनसनी फैला दी, लेकिन रांची पुलिस की त्वरित कार्रवाई से बड़ी वारदात टल गई। डोरंडा थाना क्षेत्र के गौरीशंकर नगर निवासी महेंद्र दुबे के पुत्र अमन के अपहरण की सूचना मिलते ही पुलिस ने विशेष अभियान शुरू किया और महज दो घंटे के भीतर युवक को सुरक्षित बरामद कर लिया। इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अपहरण में इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो वाहन भी जब्त कर ली गई है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है।

रिंग रोड के पास पुलिस ने आरोपियों को दबोचा
पुलिस के अनुसार, अपहरण की सूचना मिलते ही तकनीकी टीम को सक्रिय कर दिया गया। मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी इनपुट के आधार पर आरोपियों का पीछा शुरू किया गया। आरोपी स्कॉर्पियो से शहर के अलग-अलग इलाकों में घूमते रहे ताकि पुलिस को भ्रमित किया जा सके, लेकिन पुलिस लगातार उनकी गतिविधियों पर नजर बनाए रही।
आखिरकार रिंग रोड के पास पुलिस ने वाहन को घेर लिया और अपहृत अमन को सुरक्षित छुड़ा लिया। इस दौरान आयुष, शुभम और यर्थाथ नामक तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। रांची अपहरण मामला में पुलिस की इस तेज कार्रवाई की सराहना की जा रही है।
10 लाख रुपये की फिरौती मांगने का आरोप
प्राथमिकी के अनुसार, अमन के पिता महेंद्र दुबे ने बताया कि 22 जुलाई की रात करीब 10:11 बजे उनकी पत्नी के मोबाइल पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने कहा कि अमन का बिग बास्केट कार्यालय से अपहरण कर लिया गया है और उसे छोड़ने के बदले 10 लाख रुपये की फिरौती मांगी।
परिवार ने तुरंत अमन के मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। आरोपियों ने कथित तौर पर धमकी दी कि यदि जल्द फिरौती की रकम नहीं पहुंचाई गई तो अमन की हत्या कर दी जाएगी। इसके बाद परिवार ने डोरंडा थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
जांच में अन्य संदिग्धों की भी तलाश
पुलिस जांच के दौरान आयुष, शुभम और यर्थाथ के अलावा प्रिंस तथा चार अन्य अज्ञात लोगों की संलिप्तता की जानकारी भी सामने आई है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और फरार संदिग्धों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस अपहरण की योजना पहले से बनाई गई थी या फिर किसी व्यक्तिगत विवाद के कारण वारदात को अंजाम दिया गया।
आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड भी आया सामने
रांची अपहरण मामला की जांच में यह भी सामने आया कि गिरफ्तार तीनों आरोपियों का पहले से आपराधिक इतिहास रहा है। पुलिस के मुताबिक, वे मारपीट और जानलेवा हमला जैसे मामलों में पहले भी जेल जा चुके हैं। अब पुलिस उनके पुराने मामलों और आपराधिक नेटवर्क की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे किसी बड़े गिरोह से जुड़े हैं या नहीं।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
देर रात फिरौती का फोन आने के बाद परिवार में अफरा-तफरी मच गई। शिकायत मिलते ही डोरंडा थाना पुलिस ने बिना समय गंवाए तकनीकी सर्विलांस, मोबाइल ट्रैकिंग और फील्ड टीमों की मदद से ऑपरेशन शुरू किया। पुलिस की त्वरित कार्रवाई के कारण अपहृत युवक को बहुत कम समय में सुरक्षित बरामद कर लिया गया।
यह घटना बताती है कि आधुनिक तकनीक और समय पर मिली सूचना गंभीर अपराधों के खुलासे में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
हालांकि पुलिस ने तेज कार्रवाई कर युवक को सुरक्षित बचा लिया, लेकिन रांची अपहरण मामला ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था और संगठित अपराध को लेकर कई सवाल भी खड़े किए हैं। दिन-प्रतिदिन बढ़ती आपराधिक घटनाओं के बीच लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक स्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के आसपास निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के साथ-साथ सीसीटीवी नेटवर्क और पुलिस गश्त को और प्रभावी बनाने की जरूरत है।
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