News Saga Desk
हजारीबाग। झारखंड में जेल में बंद स्वास्थ्यकर्मियों का भी ट्रांसफर कर दिया जा रहा है। दरअसल झारखंड सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने हाल ही में राज्यभर में बड़े पैमाने पर स्वास्थ्यकर्मियों का स्थानांतरण किया है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि जिन डॉक्टर पर भ्रष्टाचार के आरोप साबित हो चुके हैं और जो फिलहाल सेंट्रल जेल हजारीबाग में बंद हैं, उनका भी तबादला कर दिया गया है, मानो वे अब भी सेवा में हों। मामला हजारीबाग जिले के चौपारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है, जहां के चिकित्सा प्रभारी डॉ सतीश कुमार को 1 जुलाई 2025 को एसीबी (ACB) की टीम ने 3000 रुपये घूस लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया और फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में हैं। इसके बावजूद, स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी तबादला सूची में डॉ सतीश कुमार का नाम शामिल है और उन्हें हजारीबाग ट्रामा सेंटर में “चिकित्सा पदाधिकारी” के पद पर पदस्थापित कर दिया गया है। यह आदेश सामने आते ही स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। इस ‘अजब-गजब तबादला’ नीति को लेकर आम जनता ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी भी आश्चर्यचकित हैं।
सवाल यह उठ रहा है कि जो डॉक्टर सेवा में हैं, उन्हें हटाकर जो जेल में बंद हैं, उन्हें स्थानांतरित करना क्या विभागीय अनदेखी है या कोई और खेल? मामले पर अभी तक स्वास्थ्य विभाग या संबंधित अधिकारियों की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन सूत्रों की मानें तो स्थानांतरण सूची तैयार करते समय कई नाम बिना सत्यापन के जोड़ दिए गए, और यह पूरी प्रक्रिया ‘रूटीन तबादला’ बता कर दबाने की कोशिश की जा रही है। बता दें कि 1 जुलाई को डॉ सतीश कुमार को 3 हजार घूस लेते हुए गिरफ्तार किया गया था।
हजारीबाग जिले के चौपारण प्रखंड के दादपुर गांव के रहनेवाले उज्ज्वल कुमार सिन्हा जो कि ममता वाहन के मालिक हैं। उन्होंने चौपारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ सतीश कुमार के खिलाफ एसीबी में शिकायत दर्ज करायी थी. अपनी शिकायत में उन्होंने कहा था कि ममता वाहन से संबंधित बिलों का भुगतान के लिए उनसे आग्रह किया था। इन बिलों पर हस्ताक्षर करने के एवज में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ सतीश कुमार ने रिश्वत की मांग की थी। वह घूस देना नहीं चाहते थे. इसलिए उन्होंने इसकी शिकायत हजारीबाग ACB से की। शिकायत की पुष्टि के बाद एसीबी ने त्वरित कार्रवाई की. जाल बिछाते हुए डॉ सतीश कुमार को तीन हजार रुपए घूस लेते दबोच लिया था।
No Comment! Be the first one.