उत्पाद सिपाही भर्ती पेपर लीक मामले में छह आरोपितों की जमानत पर सुनवाई, 29 मई को अगली तारीख

NEWS SAGA DESK

रांची : झारखंड में उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा से जुड़े पेपर लीक मामले में मंगलवार को अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत में छह आरोपितों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान मामले के अनुसंधानकर्ता ने अदालत में आरोपितों के आपराधिक इतिहास, केस डायरी और जांच से जुड़े अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 29 मई की तिथि निर्धारित की है।

इसी मामले में आरोपित गौरव कुमार की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत याचिका पर भी सुनवाई की गई। वहीं विकास कुमार, आशीष कुमार, योगेश प्रसाद समेत अन्य तीन आरोपितों ने नियमित जमानत याचिका दाखिल की है। जांच एजेंसियों के अनुसार इनमें से कुछ आरोपित कथित पेपर सॉल्वर गिरोह के सक्रिय सदस्य हैं, जो अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने के नाम पर अवैध गतिविधियों में शामिल थे।

मामले का खुलासा 11 अप्रैल की रात हुआ था, जब पुलिस को तमाड़ थाना क्षेत्र के रड़गांव स्थित एक अर्धनिर्मित भवन में संदिग्ध गतिविधियों की गुप्त सूचना मिली। इसके बाद विशेष टीम ने देर रात छापेमारी की। पुलिस को देखते ही वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई, लेकिन त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मौके से 154 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपितों में अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय बताए जा रहे पेपर लीक गिरोह के कथित सरगना अतुल वत्स, विकास Kumar, शेर सिंह, आशीष कुमार और योगेश प्रसाद शामिल हैं। इसके अलावा सात महिला आरोपितों को भी गिरफ्तार किया गया था। जांच में सामने आया कि गिरोह अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले संभावित प्रश्नों के उत्तर रटवा रहा था।

पुलिस जांच के अनुसार अभ्यर्थियों को तमाड़ के रड़गांव में गुप्त रूप से ठहराया गया था। वहां उनके मोबाइल फोन और एडमिट कार्ड अपने कब्जे में रखे गए थे, ताकि किसी तरह की सूचना बाहर न जा सके। जांच में यह भी पता चला कि परीक्षा में सफलता दिलाने के बदले अभ्यर्थियों से 10-10 लाख रुपये तक की रकम तय की गई थी। कुछ अभ्यर्थियों ने गिरोह के सदस्यों के नाम पर बैंक चेक भी दिए थे।

इस मामले में तमाड़ थाना में कांड संख्या 21/2026 के तहत कुल 166 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। इनमें 152 पुरुष अभ्यर्थी, सात महिला अभ्यर्थी, पांच कथित गिरोह सरगना और अन्य सहयोगी शामिल हैं। गिरफ्तार सभी आरोपितों को 13 अप्रैल को अदालत में पेश किया गया था, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क, आर्थिक लेन-देन और पेपर लीक तंत्र की गहराई से जांच कर रही हैं। मामले के सामने आने के बाद राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

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