14वीं JPSC परीक्षा गड़बड़ी मामले में CID ने विशेष अदालत में दूसरी चार्जशीट दाखिल कर दी है। बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार सहित 10 आरोपियों के नाम शामिल। जानें क्या हैं खुलासे और जांच का पूरा अपडेट।
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं परीक्षा में सामने आई कथित गड़बड़ियों और धांधली की जांच कर रही सीआईडी (CID) ने इस बहुचर्चित मामले में अपनी दूसरी चार्जशीट (पूरक आरोप-पत्र) विशेष अदालत में दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में जांच एजेंसी ने बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार समेत कुल 10 प्रमुख आरोपियों को शामिल किया है। इन सभी आरोपियों की गिरफ्तारी पिछले साल अगस्त महीने में विभिन्न तिथियों पर की गई थी। इसके साथ ही, मामले के शेष बचे 12 आरोपियों के खिलाफ आगामी दिसंबर माह में अगली चार्जशीट दाखिल किए जाने की पूरी संभावना है।

अब तक इस हाई-प्रोफाइल मामले में जांच एजेंसी कुल 34 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इससे पहले तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष एल ख्यांग्ते समेत 12 आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
परीक्षा पास कराने के लिए 20 लाख रुपये में तय हुआ था सौदा
सीआईडी की विस्तृत जांच में अभ्यर्थियों से अवैध रूप से पैसे वसूलने, दलालों व बिचौलियों के एक बड़े नेटवर्क तथा बैंक खातों के जरिए किए गए संदिग्ध वित्तीय लेनदेन (Financial Transactions) के कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसी को ऐसे पुख्ता संकेत मिले हैं कि परीक्षा में सफलता दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से न केवल नकद (Cash) बल्कि आरटीजीएस (RTGS), यूपीआई (UPI) और हवाला के माध्यम से भी भारी-भरकम रकम ली गई थी।
सूत्रों के मुताबिक, एक-एक अभ्यर्थी को परीक्षा पास कराने के लिए 20-20 लाख रुपये तक में सौदा तय किए जाने का मामला भी जांच के दायरे में प्रमुखता से शामिल है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्था, आयोग के अंदरूनी अधिकारियों और बाहर सक्रिय बिचौलियों के बीच किस स्तर पर आर्थिक सांठगांठ (Nexus) काम कर रही थी।
बैंक खातों और कॉल डिटेल्स (CDR) से जोड़ी जा रही कड़ियां
जांच को पुख्ता और वैज्ञानिक आधार देने के लिए सीआईडी ने गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों की डिटेल्स और उनके मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिपोर्ट (CDR) का बारीकी से विश्लेषण किया है। इसके आधार पर संदिग्ध लेन-देन और आरोपियों के बीच आपसी संपर्क की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया गया है।
जांच एजेंसी यह भी गहराई से पड़ताल कर रही है कि अभ्यर्थियों से अवैध वसूली के जरिए जुटाई गई रकम आखिरकार किन-किन प्रभावशाली लोगों तक पहुंची और इस पूरे रैकेट में किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी। आर्थिक लेन-देन के अलावा परीक्षा एजेंसी और आयोग से जुड़े लोगों के संपर्कों को भी इस जांच में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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