लोहरदगा का मॉडल महिला कॉलेज बना जर्जर ढांचा, चार साल बाद भी नहीं शुरू हो पाई नियमित पढ़ाई

NEWS SAGA DESK

लोहरदगा: वर्ष 2021 में जब झारखंड की तत्कालीन राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने लोहरदगा के बरही स्थित मॉडल महिला कॉलेज का उद्घाटन किया था, तब इलाके में उत्साह और उम्मीदों की लहर थी। माना जा रहा था कि यह कॉलेज बेटियों की उच्च शिक्षा का नया केंद्र बनेगा। लेकिन चार साल बाद हकीकत बिल्कुल उलट है — कॉलेज अब केवल एक इमारत बनकर रह गया है, जहां न शिक्षण व्यवस्था है, न विद्यार्थियों की उपस्थिति।

कॉलेज में करीब 800 छात्राओं का नामांकन दर्ज है, लेकिन रोज़ाना मुश्किल से 10–12 छात्राएं ही कक्षाओं में दिखाई देती हैं। कारण साफ है — कॉलेज में केवल दो अनुबंधित शिक्षक कार्यरत हैं और बीएस कॉलेज के प्राचार्य को प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी दी गई है, जो साल में केवल दो अवसरों पर कॉलेज आते हैं।

गुरुवार को दोपहर के समय कॉलेज का दृश्य उसकी वास्तविक स्थिति बयां कर रहा था — पूरे परिसर में पांच छात्राएं, दो शिक्षिकाएं और कुछ कर्मचारी मौजूद थे। साफ पानी की व्यवस्था नहीं, गंदे शौचालय और प्रयोगशालाओं में कबाड़ होते उपकरण यहां की बदहाली की गवाही दे रहे हैं।

कुड़ुख विभाग की शिक्षिका डॉ. प्रमिला उरांव ने कहा, “कॉलेज में शिक्षकों की भारी कमी है। स्वच्छता, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति बेहद खराब है। इन समस्याओं का समाधान तुरंत जरूरी है।”

रांची विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू सुदेश कुमार साहू के अनुसार, “राज्य सरकार ने चार मॉडल महिला कॉलेजों की इमारतें तो बना दीं, लेकिन शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की। जब पुराने कॉलेजों में ही शिक्षक नहीं हैं, तो नए कॉलेजों की व्यवस्था कैसे चलेगी?”

चार साल पहले जिस कॉलेज को बेटियों के सशक्तिकरण का प्रतीक बताया गया था, आज वही अधूरे वादों और प्रशासनिक लापरवाही की मिसाल बन गया है। लोहरदगा का यह कॉलेज अब उन छात्राओं की टूटी उम्मीदों की कहानी कह रहा है, जिनके सपनों की उड़ान अधूरी रह गई।

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