कोल्हान विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने बेटियों की शिक्षा, शोध, नवाचार और नियमित शैक्षणिक सत्र पर जोर दिया।
News Saga Desk
चाईबासा। कोल्हान विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह में झारखंड के राज्यपाल सह राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का संदेश दिया। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री हासिल करने का अवसर नहीं है, बल्कि शिक्षा को समाज के कल्याण और जिम्मेदारी से जोड़ने का संकल्प लेने का भी महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने विशेष रूप से बेटियों की उच्च शिक्षा, जनजातीय क्षेत्रों में शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार, शोध, नवाचार और विश्वविद्यालयों में नियमित शैक्षणिक सत्र पर जोर दिया।
कोल्हान विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल का संबोधन
कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के सातवें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए शिक्षा के व्यापक उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक महत्व केवल उपाधि प्राप्त करने या अच्छी नौकरी हासिल करने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में जिम्मेदारी की भावना विकसित करना और उन्हें समाज के लिए उपयोगी बनाना भी है।
राज्यपाल ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी शिक्षा और ज्ञान का उपयोग समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान में करने का आह्वान किया। उनके अनुसार, शिक्षित युवा अपने ज्ञान और कौशल के माध्यम से सामाजिक एवं आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
बेटियों की उच्च शिक्षा को प्राथमिकता देने पर जोर
राज्यपाल ने अपने संबोधन में बेटियों की शिक्षा को विशेष प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि एक बेटी की शिक्षा केवल उसके व्यक्तिगत जीवन को ही नहीं बदलती, बल्कि पूरे परिवार और आने वाली पीढ़ियों को भी नई दिशा प्रदान करती है। इसलिए ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाली बेटियों के लिए उच्च शिक्षा के अवसरों का विस्तार करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों की छात्राओं को उच्च शिक्षा तक सहज पहुंच उपलब्ध कराने के लिए छात्रावास, छात्रवृत्ति और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण जैसी सुविधाओं को मजबूत करना होगा। इसके साथ ही कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराना भी आवश्यक है, ताकि छात्राएं शिक्षा प्राप्त करने के बाद आत्मनिर्भर बन सकें।

राज्यपाल के अनुसार, बेटियों की शिक्षा में आने वाली बाधाओं को दूर करने और उन्हें बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने से समाज के समग्र विकास को गति मिल सकती है।
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जनजातीय संस्कृति और स्थानीय ज्ञान को शिक्षा से जोड़ने की जरूरत
राज्यपाल ने कोल्हान विश्वविद्यालय की भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय क्षेत्र में स्थित इस विश्वविद्यालय की शिक्षा के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका है। कोल्हान क्षेत्र की जनजातीय भाषाएं, परंपराएं, सांस्कृतिक विविधता और प्रकृति के साथ समाज का गहरा संबंध इसकी विशिष्ट पहचान हैं।
उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ स्थानीय ज्ञान और परंपराओं का सार्थक समन्वय किया जाना चाहिए। इससे शिक्षा अधिक प्रासंगिक बनेगी और विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर मिलेगा। स्थानीय ज्ञान को आधुनिक तकनीक और शोध के साथ जोड़कर क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप नए समाधान भी विकसित किए जा सकते हैं।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहने का आह्वान करते हुए कहा कि आधुनिक शिक्षा हासिल करने के साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
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