News Saga Desk
Kishanganj जिले के भवन निर्माण विभाग में एक बार फिर टेंडर प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग पर आरोप है कि पहले कार्य पूरा कराया गया और बाद में कागजी प्रक्रिया पूरी करने के लिए निविदा जारी की गई। मामले को लेकर विभाग की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है।
अल्पकालीन निविदा संख्या-03/2026-27 पर विवाद
जानकारी के अनुसार 7 मई को जारी अल्पकालीन निविदा संख्या-03/2026-27 में शामिल पांच कार्यों में से तीन काम पहले ही पूरे किए जाने की चर्चा है। आरोप है कि संबंधित कार्य करीब चार महीने पहले ही विभाग के करीबी संवेदक द्वारा करा लिए गए थे।
हालांकि भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता पंकज कुमार ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि पूरी टेंडर प्रक्रिया नियमानुसार अपनाई गई है।
“पहले काम, फिर टेंडर” के आरोप
विभाग पर आरोप है कि पूर्व में कराए गए कार्यों को वैध रूप देने और भुगतान प्रक्रिया पूरी करने के लिए बाद में टेंडर निकाला गया। स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि विभाग में लंबे समय से “टेंडर मैनेज” का खेल चल रहा है।
आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से पहले चुनिंदा ठेकेदारों को काम दे दिया जाता है और बाद में नियमों का पालन दिखाने के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी की जाती है। इससे सरकारी कार्यों में पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जिला परिषद सदस्य ने लगाए गंभीर आरोप
शुक्रवार को जिला परिषद सदस्य ई. नासिक नादिर ने भवन निर्माण विभाग पर बड़े पैमाने पर अनियमितता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारी अपने चहेते ठेकेदारों से पहले ही काम पूरा करवा लेते हैं और बाद में औपचारिकता निभाने के लिए टेंडर जारी किया जाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा खेल सरकारी राशि की निकासी और कमीशनखोरी के लिए किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता समाप्त हो रही है।
निष्पक्ष जांच की मांग
जिप सदस्य ने कहा कि इस व्यवस्था के कारण छोटे ठेकेदारों को काम नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो जनहित में आंदोलन शुरू किया जाएगा। अब पूरे मामले में जिला प्रशासन की कार्रवाई पर लोगों की नजर टिकी हुई है।
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