News Saga Desk
Santosh Kumar Gangwar ने कहा कि आज जरूरत केवल खनन की नहीं, बल्कि सतत और उत्तरदायी खनन की है, जिसमें विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ें।
राज्यपाल सोमवार को Indian Institute of Coal Management में विज्ञान भारती के तत्वावधान में आयोजित “Sustainable Mining and Ecological Restoration” विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं प्रदर्शनी को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन Coal India Limited, IIT (ISM) Dhanbad, CSIR-CIMFR, Central University of Jharkhand समेत कई संस्थानों के सहयोग से किया गया।
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस की दी शुभकामनाएं
राज्यपाल ने “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस” की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिवस भारत की वैज्ञानिक क्षमता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और नवाचार की शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने वर्ष 1998 में पोखरण में हुए “ऑपरेशन शक्ति” परमाणु परीक्षणों का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee के नेतृत्व में भारत ने विश्व मंच पर अपनी वैज्ञानिक ताकत और आत्मविश्वास का परिचय दिया था।
उन्होंने कहा कि उस समय अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और चुनौतियों के बावजूद भारत अपने संकल्प पर अडिग रहा और मजबूती के साथ आगे बढ़ा।
झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य
राज्यपाल ने कहा कि झारखंड प्राकृतिक संसाधनों और खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है। यहां उपलब्ध कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट और यूरेनियम जैसे खनिज देश की औद्योगिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में “सस्टेनेबल माइनिंग” भविष्य की अनिवार्य आवश्यकता बन चुकी है।
राज्यपाल ने कहा कि प्राकृतिक संसाधन केवल आर्थिक विकास का माध्यम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर भी हैं। हमें ऐसा भारत बनाना है, जहां विकास भी हो, पर्यावरण भी सुरक्षित रहे, उद्योग भी आगे बढ़े और प्रकृति भी मुस्कुराती रहे।
वैज्ञानिकों और छात्रों से किया आह्वान
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में देश “विकसित भारत @2047”, “आत्मनिर्भर भारत” और “सतत विकास” के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने “Lifestyle for Environment (LiFE)” के संदेश को प्रकृति और प्रगति के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में प्रेरणादायी बताया। साथ ही वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने शोध और नवाचारों को समाज और धरातल से जोड़ें, ताकि विज्ञान और तकनीक का लाभ व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंच सके।
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