News Saga Desk
चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री Narendra Modi देश के विकास और मजबूत अर्थव्यवस्था के दावे कर रहे थे। लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद प्रधानमंत्री की एक अपील ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
सिकंदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने लोगों से खर्च में कटौती और स्वदेशी अपनाने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि लोग सोने की खरीद कम करें, विदेश यात्राओं से बचें, पेट्रोल-डीजल की खपत घटाएं और विदेशी उत्पादों पर निर्भरता कम करें। इसके साथ ही उन्होंने खाने के तेल और रासायनिक खाद के इस्तेमाल में कमी लाने की भी सलाह दी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर हर परिवार खाने के तेल का उपयोग कम करे तो इससे देश की विदेशी मुद्रा की बचत होगी और लोगों की सेहत भी बेहतर रहेगी। किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि रासायनिक खाद के आयात पर देश का बड़ा पैसा खर्च होता है।
हालांकि प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद विपक्ष ने भाजपा सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह “उपदेश नहीं बल्कि सरकार की नाकामी का सबूत है।” राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि 12 साल के शासन के बाद सरकार जनता को यह बताने लगी है कि क्या खरीदना है और क्या नहीं।
वहीं समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने भी भाजपा सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि “देश का सबसे बड़ा संकट खुद भाजपा सरकार बन चुकी है।” अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान भाजपा नेताओं ने चार्टर फ्लाइट्स, आलीशान होटलों और बड़े प्रचार अभियानों का इस्तेमाल किया, लेकिन अब आम जनता से संयम बरतने की अपील की जा रही है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तंज कसते हुए कहा कि अगर इतनी पाबंदियां लगानी पड़ रही हैं तो फिर ‘5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी’ का लक्ष्य कैसे पूरा होगा। उन्होंने कहा कि डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है जबकि रुपया कमजोर होता जा रहा है। साथ ही उन्होंने सरकार की नीतियों को महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक दबाव के लिए जिम्मेदार ठहराया।
विपक्ष ने भाजपा सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। विपक्षी दलों का आरोप है कि पारंपरिक गुटनिरपेक्ष नीति से हटकर कुछ देशों और गुटों के साथ बढ़ती नजदीकियों का असर अब देश की अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। विपक्ष का कहना है कि इसका सीधा असर महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक दबाव के रूप में आम जनता पर पड़ रहा है।
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