सोना कम खरीदिए, ईंधन बचाइए…PM मोदी की अपील के बाद वायरल हुई 1967 की एक अखबार की कटिंग

News Saga Desk

देश इस समय वैश्विक आर्थिक दबाव, बढ़ती तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसी बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने लगातार दूसरे दिन देशवासियों से ईंधन और सोने की खपत कम करने की अपील की है। गुजरात के वडोदरा में ‘सरदार धाम हॉस्टल’ के उद्घाटन समारोह में पीएम मोदी ने कहा कि भारत अपनी तेल और गैस जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर विदेशों पर निर्भर है, ऐसे में विदेशी मुद्रा की बचत करना आज सबसे बड़ी देशभक्ति है।

प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की कि जहां संभव हो, वहां अनावश्यक यात्रा कम करें और स्कूलों व दफ्तरों में ऑनलाइन व्यवस्था को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि जिस तरह देश ने कोरोना महामारी के दौरान एकजुट होकर संकट का सामना किया था, उसी तरह मौजूदा ऊर्जा संकट से भी देश मजबूती से बाहर निकलेगा।

बाजार में असर, ज्वेलरी शेयरों में गिरावट
पीएम की अपील के बाद सोमवार को सर्राफा और ज्वेलरी सेक्टर में हलचल देखी गई। कई बड़े ज्वेलरी स्टॉक्स में भारी गिरावट दर्ज की गई। कई सरे बड़े बड़े ब्रांड्स की शायरों में गिरावट दर्ज की गयी है।

केंद्र सरकार ने साफ किया है कि देश में ईंधन की कोई राशनिंग लागू नहीं की जा रही है। पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल के मुताबिक भारत के पास फिलहाल करीब 60 दिन का ईंधन और 45 दिन का एलपीजी भंडार सुरक्षित है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य फिलहाल सप्लाई और कीमतों को स्थिर बनाए रखना है।

आखिर पीएम की अपील के पीछे क्या है वजह?

  1. डॉलर के मुकाबले कमजोर होता रुपया

भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच चुका है। भारत जितना ज्यादा तेल और सोना आयात करेगा, उतना ज्यादा डॉलर बाहर जाएगा। इससे रुपया और कमजोर होगा और विदेशी सामान महंगे होंगे।

  1. तेल कीमतों का बढ़ता दबाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जबकि देश में पेट्रोल-डीजल के दाम फिलहाल स्थिर रखे गए हैं। ऐसे में तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर यही स्थिति जारी रही तो सरकार को या तो कीमतें बढ़ानी पड़ेंगी या फिर सरकारी खजाने से राहत देनी होगी।

  1. सोना और ‘डेड इन्वेस्टमेंट’

भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार सोने पर खर्च किया गया पैसा उत्पादक निवेश में नहीं जाता। यदि यही पैसा बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में पहुंचे तो रोजगार और विकास को गति मिल सकती है।

  1. पश्चिम एशिया संकट का खतरा

इजरायल-ईरान तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में सरकार चाहती है कि देश अभी से बचत मोड में आए ताकि आपात स्थिति में ऊंचे दामों पर तेल खरीदने की मजबूरी न हो।

  1. महंगाई पर नियंत्रण

पेट्रोल और डीजल महंगे होने का सीधा असर ट्रांसपोर्टेशन लागत पर पड़ता है। इससे सब्जियों, राशन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं। सरकार का मानना है कि खपत नियंत्रित रखने से महंगाई पर भी लगाम लगाई जा सकती है।

विपक्ष का हमला, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

प्रधानमंत्री की इस अपील को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे सरकार की आर्थिक विफलता से जोड़ते हुए निशाना साधा है। वहीं सोशल मीडिया पर 1967 की एक पुरानी अखबार की कटिंग वायरल हो रही है, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री Indira Gandhi ने देश में विदेशी मुद्रा संकट के दौरान लोगों से सोना नहीं खरीदने की अपील की थी।

उस समय इंदिरा गांधी ने इसे “राष्ट्रीय अनुशासन” और “देशहित” से जुड़ा कदम बताया था। अब मौजूदा हालात में इसी तरह की अपील पर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi समेत विपक्ष के कई नेताओं ने सरकार को घेरते हुए सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार इसे वैश्विक संकट के बीच एहतियाती कदम बता रही है।

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