News Saga Desk
झारखंड में जमीन विवादों को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब पेसा एक्ट यानी PESA कानून के तहत ग्राम पंचायतों को जमीन से जुड़े मामलों में ज्यादा अधिकार दिए जाएंगे। सरकार पंचायतों को जमीन के सरकारी रिकॉर्ड रजिस्टर-2 की कॉपी उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है।
इस फैसले के बाद गांव की पंचायतें यह पता लगा सकेंगी कि किस जमीन का असली मालिक कौन है, कहीं अवैध कब्जा या गलत तरीके से जमीन ट्रांसफर तो नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि इससे ग्रामीण स्तर पर जमीन विवादों का समाधान तेजी से होगा और आदिवासी जमीन की सुरक्षा भी मजबूत होगी।
PESA Act, देश के अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों को अपने गांव और संसाधनों पर अधिकार देने के लिए बनाया गया था। इस कानून का मकसद ग्राम सभा को मजबूत बनाना और स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाना है।
झारखंड के 16 अनुसूचित जिलों के 136 प्रखंड और 2066 ग्राम पंचायतों में यह व्यवस्था लागू की जाएगी। पंचायतों को रजिस्टर-2 मिलने के बाद वे जमीन से जुड़े मामलों की निगरानी कर सकेंगी।
इस में ग्राम सभा को कई अहम अधिकार भी दिए गए हैं। जैसे
- परती जमीन को खेती योग्य बनाना
- भूमिहीन लोगों को खेती के अवसर देना
- बेघर लोगों के लिए गृहस्थल चुनना
- अवैध जमीन हस्तांतरण और कब्जे के मामलों को उठाना
- CNT एक्ट और SPT एक्ट के तहत कार्रवाई की सिफारिश करना
सरकार का कहना है कि इससे गांव स्तर पर पारदर्शिता बढ़ेगी और स्थानीय लोगों को प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे। पंचायती राज विभाग ने भू-राजस्व विभाग से सभी अंचल अधिकारियों को निर्देश जारी करने का आग्रह किया है ताकि पंचायतों को रजिस्टर-2 की कॉपी उपलब्ध कराई जा सके। इसके अलावा CNT एक्ट की धारा 71A और SPT एक्ट की धारा 42 के तहत अवैध तरीके से कब्जाई गई आदिवासी जमीन को वापस दिलाने का भी प्रावधान है। सरकार का दावा है कि इस फैसले से आदिवासी जमीन की सुरक्षा, स्थानीय स्वशासन और ग्राम सभाओं की ताकत पहले से ज्यादा मजबूत होगी।
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