तुरामडीह यूरेनियम परियोजना प्रभावितों ने आंदोलन की दी चेतावनी, मांगों के समाधान के लिए बनी कोर कमेटी

NEWS SAGA DESK

जादूगोड़ा में परियोजना प्रभावित ग्रामीणों की बैठक में पुनर्वास, रोजगार, मुआवजा और ठेका मजदूरों के वेतन कटौती जैसे मुद्दों पर नाराजगी; एक महीने में कार्रवाई नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान

पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा स्थित तुरामडीह यूरेनियम परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन का संकेत दिया है। सोमवार को तुरामडीह गांव में आयोजित बैठक में परियोजना प्रभावित पांच गांवों के ग्राम प्रधानों, विस्थापित परिवारों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेता बाघराय मार्डी ने की।

बैठक में यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) प्रबंधन के साथ पूर्व में हुई वार्ताओं की समीक्षा की गई। ग्रामीणों का कहना है कि कई महत्वपूर्ण मांगों पर अब तक अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है। ऐसे में यदि निर्धारित समय के भीतर समाधान नहीं निकला, तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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पूर्व की वार्ताओं की हुई समीक्षा

बैठक में 28 मई और 8 जून को यूसीआईएल प्रबंधन तथा पांच ग्राम प्रधानों के बीच हुई बैठकों की प्रगति की समीक्षा की गई। ग्रामीणों ने कहा कि वार्ता के दौरान उठाए गए मुद्दों पर अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।

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ग्रामीणों के अनुसार, विस्थापित परिवारों के पुनर्वास, मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को नौकरी, स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार और परियोजना प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने जैसे प्रमुख मुद्दे अभी भी लंबित हैं।

ठेका मजदूरों के वेतन कटौती का मुद्दा भी उठा

बैठक में ठेका मजदूरों के वेतन से कथित अवैध कटौती का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि संवेदकों द्वारा मजदूरों के वेतन में अनियमित कटौती की जा रही है, जिससे श्रमिकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और मजदूरों को उनका पूरा पारिश्रमिक सुनिश्चित किया जाए।

कोर कमेटी का किया गया गठन

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि परियोजना प्रभावितों की मांगों को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए एक कोर कमेटी का गठन किया जाएगा।

यह कमेटी यूसीआईएल प्रबंधन के साथ नियमित वार्ता करेगी, लंबित मांगों पर होने वाली कार्रवाई की निगरानी करेगी और प्रभावित परिवारों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।

ग्रामीणों का मानना है कि संगठित प्रयासों के माध्यम से ही उनकी समस्याओं का समाधान संभव है।

एक महीने बाद मांगी जाएगी प्रगति रिपोर्ट

बैठक में यह भी तय किया गया कि एक महीने बाद यूसीआईएल प्रबंधन से पूर्व में हुई वार्ताओं की प्रगति रिपोर्ट मांगी जाएगी।

यदि इस अवधि के भीतर पुनर्वास, रोजगार, मुआवजा और अन्य लंबित मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई, तो परियोजना प्रभावित ग्रामीण चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे। आंदोलन की रूपरेखा कोर कमेटी द्वारा तय की जाएगी।

वर्षों से लंबित हैं मांगें

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि परियोजना प्रभावित परिवार लंबे समय से अपने अधिकारों और मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें अपेक्षित न्याय नहीं मिला है।

ग्रामीणों ने कहा कि विकास परियोजनाओं का लाभ तभी सार्थक होगा जब प्रभावित परिवारों को उचित पुनर्वास, रोजगार और सम्मानजनक जीवन की व्यवस्था मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वे अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करेंगे।

ग्रामीणों ने किया स्वागत

बैठक से पहले झामुमो नेता बाघराय मार्डी का ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से स्वागत किया। इस दौरान उनके समर्थन में नारे भी लगाए गए।

बैठक में ग्राम प्रधान दुर्गा प्रसाद मुर्मू, कन्हाई गुइया, राजेंद्र नायक सहित पांच प्रभावित गांवों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने एकजुट होकर लंबित मांगों के समाधान के लिए आगे की रणनीति पर सहमति जताई।

अब सभी की नजर यूसीआईएल प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर रहेगी। यदि निर्धारित समय में समाधान नहीं निकलता है, तो क्षेत्र में आंदोलन तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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