भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने झारखंड सरकार के ₹99,639 करोड़ निवेश दावे पर सवाल उठाते हुए इसे पुराने निवेश प्रस्तावों की री-पैकेजिंग बताया।
पुराने निवेश प्रस्तावों की री-पैकेजिंग कर रही है सरकार: प्रतुल शाह देव
रांची: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने राज्य सरकार द्वारा हाल ही में घोषित ₹99,639 करोड़ के निवेश प्रस्तावों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि यह कोई नया निवेश नहीं है, बल्कि दावोस और यूनाइटेड किंगडम (यूके) यात्रा के दौरान घोषित पुराने निवेश प्रस्तावों को दोबारा नए पैकेज के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार जनता के सामने पुरानी घोषणाओं को नए निवेश के रूप में पेश कर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है। हालांकि भाजपा झारखंड में होने वाले हर औद्योगिक निवेश का स्वागत करती है, लेकिन “हवा-हवाई घोषणाओं” से बचना चाहिए।

दावोस में घोषित निवेश को फिर से बताया नया
प्रतुल शाह देव ने कहा कि फरवरी 2026 में दावोस और यूके दौरे के बाद राज्य सरकार ने ₹1.27 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों की घोषणा की थी। उस समय जिन कंपनियों के साथ एमओयू और निवेश समझौते किए गए थे, उन्हीं कंपनियों के नाम अब दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान फिर से नए निवेश के रूप में पेश किए गए हैं।
उनके अनुसार, जिंदल स्टील लिमिटेड (₹40,000 करोड़), जिंदल न्यूक्लियर पावर (₹30,000 करोड़), रुंगटा संस (₹10,000 करोड़), रुंगटा माइंस (₹3,000 करोड़), टाटा स्टील हिसारना (₹7,000 करोड़), अमलगम स्टील एंड पावर (₹4,980 करोड़), टाटा स्टील टिन प्लेट विस्तार (₹2,600 करोड़), अंबुजा सीमेंट (₹1,000 करोड़) और जिंदल रिन्यूएबल्स (₹650 करोड़) जैसी कंपनियों के नाम पहले भी घोषित किए जा चुके थे।
सरकार से पूछे कई सवाल
भाजपा नेता ने सरकार से पूछा कि यदि ये वास्तव में नए एमओयू हैं, तो पहले किए गए समझौतों का क्या हुआ। उन्होंने सरकार से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि पिछले छह महीनों में इन परियोजनाओं पर कितना वास्तविक निवेश हुआ, कितनी भूमि आवंटित की गई, कितने उद्योगों का निर्माण शुरू हुआ और स्थानीय युवाओं को कितने रोजगार मिले।
न्यूक्लियर पावर परियोजना पर भी उठाए सवाल
प्रतुल शाह देव ने ₹30,000 करोड़ के जिंदल न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा पूरी तरह केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है और किसी भी परमाणु ऊर्जा संयंत्र की स्थापना के लिए केंद्र सरकार, परमाणु ऊर्जा विभाग तथा संबंधित नियामक संस्थाओं की मंजूरी आवश्यक होती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने आवश्यक स्वीकृतियों की स्थिति स्पष्ट किए बिना इस प्रस्ताव को संभावित निवेश के रूप में शामिल कर कुल निवेश राशि में जोड़ दिया। उनके अनुसार, यदि जरूरी अनुमतियां नहीं ली गई हैं, तो इसे वास्तविक निवेश बताना उचित नहीं है।
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भाजपा ने निवेश का किया स्वागत
प्रतुल शाह देव ने कहा कि भाजपा झारखंड के विकास और रोजगार सृजन के लिए होने वाले प्रत्येक औद्योगिक निवेश का स्वागत करती है। लेकिन सरकार को केवल घोषणाओं के बजाय धरातल पर उद्योग स्थापित करने और निवेश को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने पर ध्यान देना चाहिए।
इस अवसर पर भाजपा के सह मीडिया प्रभारी अजय राय और नीरज सिंह भी मौजूद रहे।
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