हिजाब विवाद पर मायावती का बड़ा बयान, बोलीं- इसे सियासी मुद्दा न बनाएं

हिजाब विवाद पर मायावती ने कहा कि स्कूल यूनिफॉर्म और धार्मिक मान्यताओं जैसे संवेदनशील मुद्दों को आपसी समझ से सुलझाना चाहिए, संकीर्ण राजनीति से बचना चाहिए।

News Saga Desk

हिजाब विवाद को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने बुधवार को प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि स्कूल यूनिफॉर्म, चादर या हिजाब जैसे संवेदनशील मामलों को अनावश्यक रूप से बड़ा बनाकर कानूनी विवाद में बदलने के बजाय स्कूल प्रबंधन और शासन-प्रशासन की मदद से आपसी समझ के आधार पर सुलझाया जाना चाहिए। मायावती ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों की आड़ में किसी को संकीर्ण राजनीति करने का मौका नहीं मिलना चाहिए।

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबी पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने संविधान, धार्मिक स्वतंत्रता, महिलाओं की गरिमा और सामाजिक सौहार्द का उल्लेख करते हुए संवेदनशील मुद्दों पर संयम बरतने की अपील की।

संविधान और समान अधिकारों का किया जिक्र

मायावती ने अपने बयान में डॉ. भीमराव आंबेडकर और भारतीय संविधान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संविधान सभी जातियों और धर्मों के लोगों को समान अधिकार देता है और देश को एकता के सूत्र में बांधने की आधारशिला रखता है।

बसपा प्रमुख के मुताबिक, सभी धर्मों के लोगों को अपने धार्मिक रीति-रिवाजों और मान्यताओं के आधार पर शांतिपूर्ण जीवन जीने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि धार्मिक मामलों की संवेदनशीलता को समझते हुए उनकी पवित्रता का सम्मान किया जाना चाहिए।

उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है जब हिजाब विवाद को लेकर सार्वजनिक और राजनीतिक स्तर पर बहस देखने को मिल रही है। मायावती ने अपने बयान में किसी विवाद को अनावश्यक रूप से बढ़ाने के बजाय बातचीत और प्रशासनिक स्तर पर समाधान की जरूरत पर जोर दिया।

महिलाओं की गरिमा और सम्मान पर जोर

हिजाब विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया में मायावती ने महिलाओं की गरिमा, सम्मान और पर्दे जैसे विषयों को संवेदनशीलता के साथ देखने की बात कही। उन्होंने कहा कि महिलाओं से जुड़े ऐसे मामलों में भावनाओं और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

हिजाब विवाद

उन्होंने स्कूल यूनिफॉर्म और हिजाब जैसे मुद्दों को लेकर सीधे कानूनी लड़ाई की स्थिति पैदा करने से बचने की सलाह दी। उनके अनुसार, स्कूल प्रबंधन, प्रशासन और संबंधित पक्ष आपसी समझ तथा सूझबूझ के जरिए समाधान निकाल सकते हैं।

मायावती का कहना है कि स्थानीय स्तर पर बातचीत से विवाद का समाधान होने पर मामला अनावश्यक रूप से राजनीतिक या सामाजिक तनाव का विषय बनने से भी बच सकता है।

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कोर्ट-कचहरी में ले जाने के बजाय बातचीत की सलाह

बसपा प्रमुख ने कहा कि स्कूल यूनिफॉर्म, चादर या हिजाब जैसे मामलों को जरूरत से ज्यादा बड़ा बनाकर कोर्ट-कचहरी का मुद्दा बनाने के बजाय संबंधित संस्थानों को बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए।

उनके मुताबिक, शासन-प्रशासन और स्कूल प्रबंधन की आपसी समझ से ऐसे विवादों का समाधान संभव है। इससे अलग-अलग समुदायों के बीच अनावश्यक तनाव की स्थिति पैदा होने से भी रोका जा सकता है।

हिजाब विवाद पर मायावती की यह टिप्पणी राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि उन्होंने किसी एक पक्ष के समर्थन या विरोध के बजाय संवेदनशील मामलों में संतुलित रवैया अपनाने की बात कही है।

उनके मुताबिक, धार्मिक मामलों को लेकर संयमित भाषा और आपसी सम्मान का माहौल बनाए रखना देश और जनहित में होगा। उन्होंने यह भी कहा कि किसी धर्म या उसकी मान्यताओं से जुड़े विषय को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

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