गिरिडीह में 28 जनवरी से सजेगा कलाकारों का महाकुंभ, राष्ट्रीय नाटक-नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन

NEWS SAGA DESK

गिरिडीह में 28 जनवरी से 26वीं अखिल भारतीय बहुभाषी नाटक-नृत्य प्रतियोगिता शुरू होने जा रही है। जानें इस पांच दिवसीय महाकुंभ की खास बातें, बजट और अन्य डिटेल्स।

कला और संस्कृति की जीवंत नगरी गिरिडीह एक बार फिर इतिहास रचने के लिए पूरी तरह तैयार है। जनवरी के अंतिम सप्ताह में यहां देश भर के कलाकारों का महाकुंभ सजने वाला है। अवसर है ‘कला संगम’ के 65वें स्थापना दिवस का, जिसके तहत पांच दिवसीय 26वीं अखिल भारतीय बहुभाषी नाटक-नृत्य प्रतियोगिता का भव्य आयोजन 28 जनवरी से किया जाएगा। इस दौरान पूरा शहर चार-पांच दिनों तक कला, संस्कृति, नाटक और नृत्य की सतरंगी छटा में डूबा रहेगा, जहां एक से बढ़कर एक नाटकों का मंचन और लोक-शास्त्रीय नृत्यों की प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी।

16 राज्यों के कलाकार बिखेरेंगे अपनी संस्कृति का जलवा

इस प्रतिष्ठित आयोजन को लेकर कला संगम की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। बैठक में कला संगम के संरक्षक राजेन्द्र बगडिया और सचिव सतीश कुन्दन ने बताया कि इस महाकुंभ में हिस्सा लेने के लिए देश के विभिन्न राज्यों के नाट्य दलों को आमंत्रण भेज दिया गया है।

इस प्रतियोगिता में मणिपुर, बंगाल, झारखंड, बिहार, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर सहित कुल 16 राज्यों की कला टीमें अपनी संस्कृति का जलवा बिखेरने गिरिडीह पहुंचेंगी। इसके साथ ही कला संगम के 65वें स्थापना दिवस पर एक भव्य झांकी कार्यक्रम प्रस्तुत करने का भी प्रस्ताव रखा गया है, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया है।

लावणी और छऊ नृत्य बनेंगे मुख्य आकर्षण

संरक्षक सतिंदर सिंह सलूजा ने जानकारी दी कि इस बार का आयोजन ‘सलूजा गोल्ड’ द्वारा प्रायोजित किया जाएगा। जनवरी के अंतिम सप्ताह में आयोजित होने वाले इस कलाकारों के महाकुंभ में शहर को दुल्हन की तरह सजाया जाएगा। इस बार महाराष्ट्र का प्रसिद्ध लावणी नृत्य और झारखंड-बंगाल की पहचान छऊ नृत्य दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होंगे।

अध्यक्ष पंकज ताह ने बताया कि यह पूरा आयोजन स्व. उमा रानी ताह की स्मृति को समर्पित होगा। देश भर के कलाकारों का गिरिडीह की धरती पर एक मंच पर जुटना शहरवासियों के लिए गर्व का विषय है। वहीं, उपाध्यक्ष विशाल आनंद ने घोषणा की कि नाटक और नृत्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले देश भर के 10 चुनिंदा कलाकारों को ‘स्व. दिगंबर प्रसाद स्मृति नाट्य श्री सम्मान’ से सम्मानित किया जाएगा।

भव्य तैयारियां और प्रशासनिक सहयोग

कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने के लिए शहर में कला संगम के दिवंगत कलाकारों के नाम पर भव्य तोरण द्वार बनाए जाएंगे और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाती एक फोटो गैलरी भी सजाई जाएगी ताकि नई पीढ़ी हमारे गौरवशाली इतिहास से परिचित हो सके। बाहर से आने वाले कलाकारों के ठहरने और भोजन की उत्तम व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि पदेन संरक्षक सह अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) से एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की है, और प्रशासन के पूर्ण सहयोग से यह आयोजन और भी भव्य रूप लेगा।

सह संयोजक गोपाल दास भदानी और राजेश सिन्हा ने याद दिलाया कि यह आयोजन दर्शकों के लिए पूरी तरह निशुल्क होता है, ताकि समाज के हर वर्ग के लोग आकर नाटक और नृत्य का भरपूर आनंद उठा सकें।

8.50 लाख रुपये का बजट पारित

इस भव्य आयोजन की सफलता के लिए बैठक में सर्वसम्मति से साढ़े आठ लाख रुपये (₹8.50 Lakhs) का बजट पारित किया गया। आर्थिक व्यवस्था और प्रबंधन को सुचारू रूप से चलाने के लिए अध्यक्ष पंकज ताह और उपाध्यक्ष सुजयराज गुप्ता के नेतृत्व में अलग-अलग कोष कमिटियों का गठन किया गया है, जिसमें कई गणमान्य सदस्यों को शामिल किया गया है।

आयोजकों ने गिरिडीह के समस्त नगरवासियों से अपील की है कि वे इस सांस्कृतिक महाकुंभ में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और देशभर से आने वाले कलाकारों का उत्साहवर्धन करें।

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