बिहार में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से बाढ़ का खतरा गहराया। पटना, भोजपुर समेत 8 जिलों में हाई अलर्ट जारी, दानापुर-मनेर के कई गांव पानी में डूबे।
बिहार में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से राज्य में बाढ़ की स्थिति अत्यंत विकराल होती जा रही है। गंगा और सोन नदी के उफान के कारण राजधानी पटना के दियारा इलाकों में पानी तेजी से फैल रहा है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। राज्य सरकार और जल संसाधन विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, नालंदा, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद सहित कुल आठ जिलों को हाई अलर्ट पर रखा है।

निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और सतर्क रहने की अपील की जा रही है।
गांधी घाट पर जलस्तर ने तोड़े पुराने रिकॉर्ड
पटना के गांधी घाट पर गंगा नदी का जलस्तर पिछले कुछ दिनों में अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 1 सितंबर की सुबह गांधी घाट पर जलस्तर 49.40 मीटर दर्ज किया गया था, जो 2 सितंबर की शाम तक बढ़कर 49.98 मीटर और 3 सितंबर की सुबह 50 मीटर तक पहुंच गया। गुरुवार दोपहर 12 बजे तक यह जलस्तर 50.25 मीटर पर पहुंच गया, जो कि खतरे के निशान से करीब 1.65 मीटर ऊपर है। जल संसाधन विभाग ने चेतावनी जारी की है कि जलस्तर अपने सर्वकालिक रिकॉर्ड यानी हाईएस्ट फ्लड लेवल (HFL) को भी पार कर सकता है। इसके अलावा, मोकामा के हाथीदह क्षेत्र में भी शुक्रवार दोपहर तक जलस्तर के HFL को पार करने की संभावना जताई गई है।
दियारा क्षेत्रों में बढ़ा संकट और जनजीवन प्रभावित
गंगा और सोन नदी में आए उफान का सबसे अधिक असर दानापुर और मनेर के दियारा इलाकों में देखने को मिल रहा है। कई पंचायतों और टोलों के रास्तों पर पानी भर जाने से संपर्क मार्ग पूरी तरह कट चुके हैं। सड़कें जलमग्न होने से वाहन सेवा बंद है और कई स्थानों पर स्कूलों व घरों में पानी प्रवेश कर गया है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, आवागमन ठप होने से रोजमर्रा की जरूरी चीजों की आपूर्ति में भारी कठिनाई आ रही है। खेतों में पानी भरने से तैयार फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है, वहीं मवेशियों के लिए पशु चारा जुटाना भी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मरीजों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पर्याप्त संख्या में नावों की तैनाती, शुद्ध पीने का पानी, बच्चों के लिए दूध, भोजन सामग्री और आपातकालीन दवाओं का इंतजाम तुरंत करने का आग्रह किया है। लोगों का कहना है कि जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, इसलिए राहत और बचाव कार्य को और अधिक गति देने की आवश्यकता है।
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