दिल्ली सत्य निकेतन हादसे में जान गंवाने वाले औरैया के पवन का शव घर पहुंचा। पिता बदहवास हुए, बहनें रो पड़ीं और बीमार मां से मौत की खबर छिपाई गई।
News Saga Desk
औरैया में दिल्ली सत्य निकेतन हादसा एक परिवार की खुशियों को मातम में बदल गया। रक्षाबंधन पर चार बहनों ने जिस इकलौते भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र की कामना की थी, मंगलवार को उसी भाई का शव घर पहुंचा। दिबियापुर निवासी पवन कुमार की मौत की खबर सामने आने के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई। शव देखते ही चारों बहनें फूट-फूटकर रोने लगीं, जबकि पिता रिटायर्ड होम्योपैथी फार्मासिस्ट विशंभर सिंह बदहवास हो गए।
पवन का शव मंगलवार सुबह दिबियापुर स्थित उसके घर पहुंचा। बेटे का पार्थिव शरीर देखकर पिता की हालत बिगड़ गई। परिवार की स्थिति देखकर रिश्तेदारों और आसपास के लोगों की आंखें भी नम हो गईं। कुछ दिन पहले तक जिस घर में बेटे की पढ़ाई और भविष्य को लेकर चर्चाएं होती थीं, वहां अब मातम पसरा हुआ है।
रक्षाबंधन पर बहनों ने बांधी थी राखी
पवन अपने परिवार का इकलौता बेटा था और चार बहनों के बीच बेहद लाड़ला था। रक्षाबंधन पर वह घर आया था। चारों बहनों ने भाई की कलाई पर राखी बांधी और परिवार ने साथ मिलकर जन्माष्टमी भी मनाई। इसके बाद शनिवार को पवन दिल्ली के लिए रवाना हुआ।
परिवार के लोगों ने बताया कि दिल्ली रवाना होते समय पवन बिल्कुल सामान्य था। बहनों ने उसे हंसते हुए विदा किया था। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह मुलाकात उनकी आखिरी मुलाकात साबित होगी।
DU में लिया था बीएससी कंप्यूटर साइंस में दाखिला
पवन ने सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, दिबियापुर से इंटरमीडिएट तक पढ़ाई की थी। 20 जुलाई को उसने दिल्ली विश्वविद्यालय में बीएससी कंप्यूटर साइंस में दाखिला लिया था। उच्च शिक्षा और बेहतर भविष्य के सपनों के साथ पवन ने दिल्ली में नई जिंदगी की शुरुआत की थी, लेकिन महज डेढ़ महीने के भीतर उसका यह सफर हादसे की भेंट चढ़ गया।

पवन की बहन प्रियांशी भी दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रही है और गर्ल्स हॉस्टल में रहती है। हादसे की जानकारी मिलने के बाद वह मौके पर पहुंची और काफी देर तक अपने भाई की तलाश करती रही। देर रात पवन की मौत की जानकारी मिलने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
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मां से रोज होती थी वीडियो कॉल पर बात
पवन अपनी मां मीरा देवी के बेहद करीब था। परिवार के अनुसार, वह रोज सुबह और शाम मां से वीडियो कॉल पर बातचीत करता था। शनिवार को दिल्ली पहुंचने के बाद भी उसने मां से बात की थी। रविवार सुबह भी दोनों के बीच वीडियो कॉल पर बातचीत हुई।
इसके बाद शाम को जब पवन का फोन नहीं आया तो परिवार की चिंता बढ़ने लगी। इसी बीच दिल्ली में हादसे की खबर ने परिवार को झकझोर दिया। फोन पर बेटे की आवाज सुनने की आदी मां को अब उसके हमेशा के लिए चले जाने की जानकारी तक नहीं दी गई है।
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