बंदना टुडू की किताब IBBY-UNESCO संग्रह में शामिल

चाकुलिया की बंदना टुडू की संताली बाल पुस्तक ‘मनु एंड मिरुज मेलोडी’ IBBY-UNESCO वैश्विक संग्रह में शामिल हुई। लेखन और चित्रांकन भी खुद किया।

News Saga Desk

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया की बेटी बंदना टुडू ने संताली भाषा और आदिवासी संस्कृति को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाकर इतिहास रच दिया है। उनकी संताली बाल पुस्तक ‘मनु एंड मिरुज मेलोडी’ को प्रतिष्ठित IBBY-UNESCO वैश्विक संग्रह में शामिल किया गया है। खास बात यह है कि इस पुस्तक की कहानी लिखने के साथ-साथ इसके चित्र भी बंदना टुडू ने स्वयं बनाए हैं। छोटे से गांव से शुरू हुआ उनका सफर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुका है।

IBBY-UNESCO वैश्विक संग्रह में जगह

बंदना टुडू की पुस्तक ‘मनु एंड मिरुज मेलोडी’ को IBBY-UNESCO वैश्विक संग्रह में शामिल किया जाना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। यह सम्मान केवल एक लेखिका की सफलता नहीं, बल्कि संताली भाषा, आदिवासी समाज और उसकी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पुस्तक बच्चों को उनकी जड़ों, प्रकृति और मातृभाषा से जोड़ने की कोशिश करती है। इसके जरिए संताली जीवनशैली और संस्कृति को सरल एवं रोचक तरीके से बच्चों तक पहुंचाया गया है।

कहानी के साथ चित्र भी खुद बनाए

इस उपलब्धि को और खास बनाता है बंदना टुडू का बहुआयामी योगदान। उन्होंने पुस्तक की कहानी लिखने के साथ ही उसके चित्र भी स्वयं तैयार किए हैं। यानी किताब के शब्दों से लेकर उसके दृश्य संसार तक, रचना में उनकी अपनी कल्पना और अनुभव की झलक दिखाई देती है।

बंदना टुडू

बाल साहित्य में चित्रों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। बच्चों के लिए कहानी को समझना और उससे जुड़ना आसान बनाने में चित्र मदद करते हैं। ‘मनु एंड मिरुज मेलोडी’ में भी कहानी और चित्रों के माध्यम से संताली समाज की जीवनशैली और सांस्कृतिक पहचान को सामने लाने का प्रयास किया गया है।

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संताली और अंग्रेजी में उपलब्ध है पुस्तक

‘मनु एंड मिरुज मेलोडी’ संताली और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है। यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके माध्यम से स्थानीय भाषा और संस्कृति की कहानी व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंच सकती है।

पुस्तक में आदिवासी जीवन, प्रकृति, लोक-संगीत और पारंपरिक वाद्ययंत्रों जैसे विषयों को प्रमुखता दी गई है। इसके साथ ही बच्चों को अपनी मातृभाषा और संस्कृति से जुड़े रहने का संदेश भी दिया गया है।

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