राज्यपाल संतोष गंगवार ने विदेशी छात्रों से किया संवाद, भारत की शिक्षा परंपरा का किया उल्लेख

झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार ने रांची में ICCR छात्रवृत्ति कार्यक्रम के 36 विदेशी विद्यार्थियों से संवाद किया। छात्रों ने भारत में अपने अनुभव साझा किए।

News Saga Desk

झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने मंगलवार को लोकभवन, रांची में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत भारत में अध्ययन कर रहे विदेशी विद्यार्थियों के साथ विशेष संवाद किया। कार्यक्रम में विभिन्न देशों से आए 36 विदेशी छात्रों ने हिस्सा लिया। इस दौरान विद्यार्थियों ने भारत में अपनी शैक्षणिक यात्रा और यहां के सामाजिक एवं सांस्कृतिक अनुभवों को राज्यपाल के साथ साझा किया।

यह संवाद कार्यक्रम ICCR के क्षेत्रीय कार्यालय, पटना की ओर से आयोजित किया गया था। इस कार्यालय का क्षेत्राधिकार बिहार और झारखंड दोनों राज्यों में है।

आठ देशों के 36 विदेशी विद्यार्थी हुए शामिल

कार्यक्रम में यमन, तंजानिया, घाना, युगांडा, सोमालिया, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका सहित विभिन्न देशों के कुल 36 विदेशी विद्यार्थी शामिल हुए। ये विद्यार्थी धनबाद स्थित IIT (ISM) में उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं।

विद्यार्थी सिविल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग सहित विभिन्न विषयों में Ph.D., M.Tech. और अन्य उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत हैं।

छात्रों ने साझा किए भारत में अध्ययन के अनुभव

कार्यक्रम के दौरान विदेशी विद्यार्थियों को राज्यपाल के साथ सीधे संवाद करने का अवसर मिला। छात्रों ने अपनी शैक्षणिक यात्रा, भारत में रहने के अनुभव और भारतीय समाज के साथ अपने जुड़ाव के बारे में विचार साझा किए।

कार्यक्रम का नेतृत्व क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी, रांची मनिता के., भारतीय विदेश सेवा ने किया। उन्होंने ICCR क्षेत्रीय कार्यालय, पटना का प्रतिनिधित्व किया। इस अवसर पर IIT (ISM) धनबाद की टीम भी मौजूद रही। टीम में डीन (इंटरनेशनल रिलेशंस) प्रो. रजनी सिंह सहित अन्य अधिकारी शामिल थे।

राज्यपाल ने नालंदा और तक्षशिला की परंपरा का किया उल्लेख

अपने संबोधन में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने भारत के प्राचीन इतिहास और समृद्ध शिक्षा परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों की गौरवशाली परंपरा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की ज्ञान और शिक्षा की परंपरा सदियों से दुनिया को प्रेरणा देती रही है।

राज्यपाल ने विदेशी विद्यार्थियों से भारत की आधुनिक विकास यात्रा को करीब से समझने और यहां के अनुभवों से सीख लेने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत में अध्ययन के दौरान प्राप्त अनुभव विद्यार्थियों के लिए भविष्य में भी उपयोगी साबित हो सकते हैं।

भारत और अन्य देशों के बीच संबंध मजबूत करने पर जोर

राज्यपाल ने कहा कि जब ये विद्यार्थी भविष्य में अपने-अपने देशों में महत्वपूर्ण भूमिकाओं में होंगे, तब भारत में बिताया समय और यहां के अनुभव दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को मजबूत करने में योगदान दे सकते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से भारत की शिक्षा, संस्कृति और विकास यात्रा को समझने के साथ-साथ अपने देशों में भारत के साथ सकारात्मक संबंधों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाने की अपील की।

अंतरराष्ट्रीय शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा

इस संवाद कार्यक्रम ने अंतरराष्ट्रीय शिक्षा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और भारत तथा विभिन्न देशों के बीच जन-से-जन संबंधों को मजबूत करने में ICCR छात्रवृत्ति कार्यक्रम की भूमिका को भी सामने रखा।

विदेशी विद्यार्थियों के भारत में उच्च शिक्षा हासिल करने से न केवल शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा मिलता है, बल्कि अलग-अलग देशों के युवाओं के बीच सांस्कृतिक समझ और आपसी संवाद का दायरा भी व्यापक होता है।

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