क्या आप पकौड़े या पूड़ी तलने के बाद बचे हुए तेल से दोबारा सब्जी बनाते हैं? बार-बार तेल गर्म करने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। तेल का रंग बहुत गहरा होना, जल्दी धुआं निकलना, झाग बनना या जली हुई गंध आना ऐसे संकेत हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
NEWS SAGA DESK:
क्या आप पकौड़े, पूड़ी या कचौड़ी तलने के बाद बचा हुआ तेल दोबारा सब्जी बनाने में इस्तेमाल करते हैं? अगर हां, तो तेल को दोबारा इस्तेमाल करने की आदत पर थोड़ा ध्यान देना जरूरी है। घरों में अक्सर बचे हुए तेल को फेंकने के बजाय अगली डिश बनाने में इस्तेमाल कर लिया जाता है। हालांकि, तेल को बार-बार तेज तापमान पर गर्म करने से उसकी गुणवत्ता में बदलाव हो सकता है।
बार-बार गर्म करने से तेल में क्या बदलता है?

तेल को लगातार तेज आंच पर गर्म करने और फिर ठंडा करके दोबारा गर्म करने की प्रक्रिया से उसमें ऑक्सीडेशन जैसी रासायनिक प्रक्रियाएं बढ़ सकती हैं। खासकर डीप फ्राइंग के दौरान तेल लंबे समय तक अधिक तापमान के संपर्क में रहता है। अगर तेल का रंग बहुत गहरा हो जाए, उससे धुआं जल्दी निकलने लगे या जली हुई अथवा असामान्य गंध आने लगे, तो उसे दोबारा इस्तेमाल करने से बचना बेहतर है।
पकौड़े तलने के बाद सब्जी बनाना कितना ठीक?

पकौड़े, पूड़ी, कचौड़ी या फ्रेंच फ्राइज तलने के बाद तेल में खाने के छोटे कण और जले हुए अवशेष रह सकते हैं। दोबारा गर्म करने पर ये कण और खराब हो सकते हैं और तेल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। सिर्फ तेल को छान लेने से गर्म करने के दौरान हुए सभी रासायनिक बदलाव खत्म नहीं होते। इसलिए डीप फ्राई किए गए तेल को बार-बार इस्तेमाल करने से बचना बेहतर माना जाता है।
इन संकेतों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

अगर तेल में झाग बनने लगे, रंग काफी गहरा हो जाए, धुआं सामान्य से जल्दी निकलने लगे, जली हुई गंध आए या उसमें बड़ी मात्रा में जले हुए कण दिखाई दें, तो उसे दोबारा इस्तेमाल न करना ही बेहतर है।
सेहत के लिए क्यों जरूरी है सावधानी?
बार-बार गर्म किए गए तेल में ऑक्सीडेशन से जुड़े यौगिक बढ़ सकते हैं। ऐसे तेल का लगातार और अधिक सेवन संतुलित डाइट के लिहाज से उचित नहीं माना जाता। खासकर तली-भुनी चीजों का ज्यादा सेवन करने के बजाय भोजन में तेल की मात्रा और गुणवत्ता दोनों पर ध्यान देना जरूरी है।
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