धनबाद क्लब के ऑयस्टर हॉल में हिंदी साहित्य विकास परिषद ट्रस्ट द्वारा ‘हास्य उत्सव’ का आयोजन किया गया। सम्पत सरल, सरदार मनजीत सिंह और अमित शुक्ला ने शानदार काव्य पाठ से श्रोताओं को हँसाया।
धनबाद, 29 सितंबर 2026 — कोयलांचल धनबाद के सांस्कृतिक क्षितिज पर रविवार की शाम हंसी, व्यंग्य और ठहाकों से सराबोर रही। हिंदी साहित्य विकास परिषद ट्रस्ट द्वारा धनबाद क्लब के भव्य ऑयस्टर हॉल (Oyster Hall) में “हास्य उत्सव – हास्य कवियों के संग” का गरिमामय एवं मनोरंजक आयोजन किया गया। इस विशेष शाम में देश के ख्यातिलब्ध हास्य एवं व्यंग्य कवियों ने अपनी तीखी, चुटीली और सामाजिक विसंगतियों पर करारा प्रहार करने वाली रचनाओं से उपस्थित श्रोताओं को देर रात तक गुदगुदाया।

दीप प्रज्वलन से हुआ भव्य शुभारंभ
कार्यक्रम का औपचारिक एवं सांस्कृतिक शुभारंभ अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से श्री शिव बालक सिंह, श्री अनंत नाथ सिंह, ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री संजय आनंद, सचिव श्री राकेश शर्मा, श्री सीताराम सिंह, श्री महेश मोदी, श्री महेश प्रधान, श्री जय प्रकाश अग्रवाल, डॉ. संगीता करण, डॉ. धनबाद क्लब के सचिव श्री बसंत हेलिवाल एवं श्री दीपक सोनी उपस्थित रहे।
सम्पत सरल, मनजीत सिंह और अमित शुक्ला का चला जादू
मंच संचालन और काव्य पाठ की शुरुआत होते ही देश के जाने-माने हास्य कवियों ने अपनी प्रस्तुतियों से पूरे सभागार को तालियों और ठहाकों से गूंजने पर मजबूर कर दिया:
- सम्पत सरल: देश के प्रसिद्ध व्यंग्यकार सम्पत सरल ने अपनी विशिष्ट राजस्थानी लहजे और धारदार व्यंग्यात्मक शैली में समकालीन राजनीति एवं सामाजिक विषयों पर ऐसी चोट की कि श्रोता हंसते-हंसते लोटपोट हो गए।
- सरदार मनजीत सिंह: अपनी अनूठी हास्य शैली और बेबाक प्रस्तुतिकरण से सरदार मनजीत सिंह ने पारिवारिक व दैनिक जीवन के प्रसंगों पर चुटकुलेनुमा कविताएं सुनाकर लोगों का भरपूर मनोरंजन किया।
- अमित शुक्ला: युवा हास्य कवि अमित शुक्ला की तुकबंदी और हास्य रचनाओं को भी उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने खूब सराहा।

इन कवियों के अलावा स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करते हुए कवि बसंत जोशी एवं सुशांत कुमार ने भी अपनी उत्कृष्ट कविताओं का पाठ किया, जिसकी अतिथियों व श्रोताओं ने जमकर प्रशंसा की।
इस हास्य उत्सव का एक और प्रमुख आकर्षण साहित्यिक कृतियों का लोकार्पण रहा। कार्यक्रम के दौरान प्रख्यात स्थानीय कवयित्री अनिता निःशब्द की तीन नव-प्रकाशित पुस्तकों — “कविता की वंशी”, “अंतर्मन” एवं “नारी कीचें वजूद” का एक साथ लोकार्पण किया गया। मंच पर मौजूद सभी आमंत्रित हास्य कवियों, साहित्यकारों और वरिष्ठ अतिथियों ने संयुक्त रूप से इन तीनों पुस्तकों का विमोचन कर अनिता निःशब्द को बधाई दी।
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