झारखंड हाईकोर्ट का अहम फैसला, दिव्यांग अभ्यर्थी को 8 सप्ताह में नौकरी देने का आदेश

NEWS SAGA DESK

झारखंड हाईकोर्ट ने दुमका में चौकीदार नियुक्ति मामले में महज 3 सेकंड की देरी पर दिव्यांग अभ्यर्थी को राहत देते हुए 8 सप्ताह में नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

झारखंड हाईकोर्ट का दिव्यांग अभ्यर्थियों के हक में ऐतिहासिक फैसला झारखंड हाईकोर्ट से दिव्यांग अधिकार और सरकारी नौकरियों में चयन प्रक्रिया से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की एकलपीठ ने दुमका जिले में चौकीदार नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि महज 3 सेकेंड की मामूली देरी के आधार पर किसी दिव्यांग अभ्यर्थी को नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने प्रार्थी को नियुक्ति का पूर्ण हकदार माना है और राज्य सरकार को 8 सप्ताह (दो महीने) के भीतर नियुक्ति पत्र जारी करने का सख्त निर्देश दिया है।

क्या है पूरा मामला? दुमका जिले में चौकीदार बहाली के लिए प्रक्रिया आयोजित की गई थी, जिसमें दिव्यांग श्रेणी के तहत एक अभ्यर्थी ने भाग लिया था। शारीरिक दक्षता अथवा निर्धारित मानदंड प्रक्रिया के दौरान प्रार्थी मात्र 3 सेकेंड से पिछड़ गया। राज्य सरकार और संबंधित चयन समिति ने नियमों का हवाला देते हुए अभ्यर्थी की उम्मीदवारी को खारिज कर दिया और उसे नियुक्ति देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद पीड़ित दिव्यांग अभ्यर्थी ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

अदालत में वकीलों की दलीलें और कानून का हवाला सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता शुभम मिश्रा ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016’ (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) की धारा 2 (y) और धारा 20 के तहत दिव्यांग अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रियाओं में ‘उचित सुविधा’ (Reasonable Accommodation) प्रदान करना सरकार और प्रशासन की वैधानिक व नैतिक जिम्मेदारी है। इसके समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व में दिए गए विभिन्न नज़ीरों और दिशा-निर्देशों का भी हवाला दिया गया।

दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि नियुक्ति नियमावली में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए अलग से अतिरिक्त समय या छूट देने का कोई स्पष्ट लिखित प्रावधान नहीं है, इसलिए चयन समिति ने नियमों के अनुसार ही कार्रवाई की थी।

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