झारखंड में जेल व्यवस्था को केवल सजा तक सीमित रखने के बजाय कैदियों के सुधार और पुनर्वास पर जोर दिया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने इस दिशा में अहम पहल की है।
NEWS SAGA DESK
झारखंड में जेल व्यवस्था को केवल सजा तक सीमित रखने के बजाय कैदियों के सुधार और पुनर्वास पर जोर दिया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने इस दिशा में अहम पहल की है। अब योग्य कैदियों को जेल की चारदीवारी के भीतर बंद रखने के बजाय बेहतर माहौल में रहने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर देने की तैयारी है। इसके लिए राज्य के चार प्रमुख शहरों में ओपन बैरक तैयार कर ली गई हैं।
इन ओपन बैरकों को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने और कैदियों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विशेष दिशा-निर्देश तैयार किए जा रहे हैं। इसके लिए झारखंड लीगल सर्विस अथॉरिटी के सहयोग से स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ओपन बैरक में रहने वाले कैदियों को उचित सुविधाएं मिलें और उनके पुनर्वास की प्रक्रिया प्रभावी तरीके से आगे बढ़े।
महिला कैदियों के लिए भी बनेगी विशेष ओपन जेल
इस योजना का दायरा केवल पुरुष कैदियों तक सीमित नहीं रहेगा। सुप्रीम कोर्ट की मंशा के अनुरूप महिला कैदियों के लिए भी अलग ओपन जेल विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इससे पात्र महिला कैदियों को भी सुधार और पुनर्वास की बेहतर व्यवस्था मिल सकेगी। वहीं, हजारीबाग में ओपन जेल के विस्तार की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इसके लिए करीब 32 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। यहां भविष्य में बड़े स्तर पर खुली जेल की सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
कैदियों को मिलेंगी बेहतर स्वास्थ्य और जीवनशैली सुविधाएं
ओपन जेल व्यवस्था में कैदियों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए विशेष समितियां गठित की जाएंगी, जो चिकित्सा सुविधाओं, जिम, पौष्टिक भोजन और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी करेंगी। इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एमएस सोनक की खंडपीठ ने अगली सुनवाई के लिए 21 जनवरी की तारीख निर्धारित की है। कुल मिलाकर, झारखंड में ओपन बैरक की यह पहल जेल व्यवस्था में सुधार के साथ कैदियों को समाज की मुख्यधारा में दोबारा शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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